रेलवे कर्मचारियों के पास रहने के लिए आवास नहीं है और सरकारी आवासों में किराएदार मौज मार रहे हैं। कई आवासों में ऐसे लोगों का कब्जा है, जिनका वर्षों पहले यहां से तबादला हो चुका है। मामला नौगढ़ स्टेशन का है।
सरकारी आवासों में अरसे से अनधिकृत लोगों के होने के बाद भी जिम्मेदार मौन हैं। कर्मचारी बाहर किराए के महंगे कमरे में रहने को मजबूर हैं। नौगढ़ स्टेशन परिसर में ही रेलवे कर्मचारियों के लिए आवासीय कॉलोनी बनी हुई है।
इनमें विभिन्न श्रेणियों के करीब एक दर्जन से अधिक आवास हैं। मजार की तरफ बने आवास गेट मैन, प्वाइंट्स मैन जैसे कर्मचारियों के लिए हैं। कागजों में इनका आवंटन रेलवे कर्मचारियों के नाम पर है, मगर इनमें रहने वाले ज्यादातर बाहरी लोग हैं।
इसके एवज में वह आवंटी को हर माह किराया भी भुगतान करते हैं। रेलवे से सस्ते दरों पर आवास लेकर उसे करीब दोगुने रेट से किराए पर देकर कर्मचारी मुनाफा कमा रहे हैं।
यही नहीं कई कर्मचारी तो ऐसे भी हैं, जिन्हें दोहरा लाभ मिल रहा है। वर्षों पहले उनका तबादला अन्यत्र हो गया। नए स्थान पर जाकर उन्होंने वहां भी आवास आवंटित कर लिए, मगर यहां का कब्जा नहीं छोड़ा।
बाद में इन आवासों में किराएदार रख लिया। खाली आवासों में किराएदार बस जाएं, तब तो कुछ समझ आता है, मगर यहां रेल कर्मचारियों के लिए ही आवास का टोटा है, फिर बाहरियों को रखने की बात हर किसी को नागवार गुजर रही है। इस संबंध में नौगढ़ रेलवे स्टेशन के अधीक्षक दुर्गेश कुमार ने बताया कि रेलवे कॉलोनी के कई आवास जर्जर हैं।
इनमें कोई कैसे रहेगा। जहां तक बाहरियों के रहने का सवाल है तो पूर्व अधीक्षक के समय से ही ऐसा चल रहा होगा। मेरे आवास में कोई बाहरी नहीं है, रेलवे के ही कर्मचारी हैं।