मुख्य चिकित्सा अधिकारी और स्वास्थ्य कर्मचारियों का विवाद शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय के दरबार में पहुंच गया। सीएमओ और कर्मचारियों ने बारी-बारी पहुंचकर विधान सभा अध्यक्ष को दुखड़ा सुनाया। मामले में उनकी ओर से पैरवी की मांग की। विधान सभा अध्यक्ष ने तीसरे चरण के चुनाव के बाद डायरेक्टर और कलेक्टर के माध्यम से इसकी जांच कराकर जिम्मेदार पक्ष के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि, कर्मचारियों ने मांग पूरी होने तक हड़ताल और धरना अनवरत जारी रखने का निर्णय बरकरार रखा है। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते सीएमओ कार्यालय पर ताला लगा रहा। पूरे दिन काम-काज ठप रहा।
सीएमओ कार्यालय अंतर्गत आने वाले स्वास्थ्य कर्मचारी गुरुवार को दोपहर की बाद से हड़ताल पर हैं। दूसरे दिन भी
कार्य बहिष्कार जारी रहा। सुबह ही कर्मचारियों ने कार्यालय गेट पर ताला लगा दिया। सीएमओ के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरना दिया। इस बीच सीएमओ अपना पक्ष रखने विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय के इटवा स्थित आवास पहुंच गई। कर्मचारियों को इसकी जानकारी हुई तो सारे दस्तावेजों के साथ वह भी विधान सभा अध्यक्ष के आवास के लिए कूच कर गए।
वहां पहुंचकर दोनों पक्षों ने अपनी बातें रखीं। दस्तावेज और दलीलों के साथ खुद पर लगे आरोपों को खारिज करने का भरसक प्रयास किया। दोनों पक्षों की बातों को सुनने के बाद विस अध्यक्ष ने आश्वासन दिया कि शनिवार को तीसरे चरण का चुनाव खत्म होने के बाद वह मामले को स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों के समक्ष रखेंगे। डायरेक्टयर या कलेक्टर के माध्यम से इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में जिस पक्ष की गलती होगी, उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी। इस आश्वासन के बाद कर्मचारी लौटे, लेकिन अपनी हड़ताल बरकरार रखने पर अडिग रहे।
वार्ता और प्रदर्शन में उप्र मेडिकल हेल्थ एंड मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष दीपेन्द्र मणि त्रिपाठी, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष अनिल सिंह, कुष्ठ इकाई कर्मचारी संघ शहाबुद्दीन, फार्मासिस्ट एसोसिएशन के जोगेन्द्र यादव, गोविन्द ओझा, अब्दुल अजीज, राजेश श्रीवास्तव, जयराम सिंह, दस्तगीर खां, संजय गुप्ता, कमलेश उपाध्याय आदि मौजूद रहे।