बांसी। वेक्टर जनित रोगों के विरुद्ध जन जागरूकता बहुत आवश्यक है। यह बातें डायट प्राचार्य उपेंद्र कुमार ने डायट परिसर में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के समापन समारोह में कहीं। भारत सरकार की संस्था राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद तथा इंडियन साइंस कम्युनिकेशन सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में इस कार्यशाला में 30 शिक्षकों ने भाग लिया।
इसमें कठपुतली नाटकों के माध्यम से वेक्टर जनित रोगों से बचाव की जानकारी बड़ी ही रोचक और सरल माध्यम से सिखाई गई। प्रतिभागियों ने कठपुतली निर्माण और उसके संचालन तथा स्क्रिप्ट राइटिंग और नाटक लेखन को भी सीखा। अब यहींं प्रतिभागी जनपद के विभिन्न गांवो में जाकर मलेरिया, डेंगू, इंसेफेलाइटिस, चिकनगुनिया आदि रोगों के प्रति लोगों को जागरूक करेंगे। कार्यशाला में इन क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों का मार्ग दर्शन किया। इस अवसर पर बोलते हुए प्राचार्य उपेंद्र कुमार ने कहा कि कठपुतली संचार का पारंपरिक और लोकप्रिय माध्यम है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी वितरित किए।
डायट के वरिष्ठ प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं बहुत ही उपयोगी हैं। प्रवक्ता फुरकान अहमद ने सभी प्रतिभागियों से कहा कि अब वे कठपुतली माध्यम से निर्धारित विद्यालय या गांव में जाकर लोगों को जागरूक करें। इस्कॉस की ओर से संतोष त्रिपाठी ने कार्यशाला से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। शिक्षकों ने मच्छर चालीसा ए बुखार में लापरवाही पड़ेगी भारी, काला जार का प्रहार न होगा अब की बार, दिमागी बुखार, बड़ा खूंखार, मलेरिया की कहानी मच्छर की जुबानी, सही जानकारी बचाए जान, जैसे कई कठपुतली नाटक तैयार किए। इनमें शीला आर्य, नमिता चौरसिया, अनामिका सिंह, मनीष कुमार दुबे, प्रेमपाल सिंह, जलाल अख्तर, इमामुद्दीन आदि शिक्षकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।