फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

धूल से पटे सिलेंडर, बाल्टियों में रख रहे कूड़ा

Fri, 13 Jan 2017 10:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
तेतरी बाजार में बेकार पड़ा अग्निशमन यंत्र। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। आग से सुरक्षा के लिए स्कूलों में लगे अग्निशमन यंत्र धूल फांक रहे हैं। अधिकांश स्कूलों में वर्षों से यह यंत्र रिफिल नहीं कराए गए। कई जगह कबाड़ में पड़े हुए हैं। बालू रखने वाली बाल्टियों में कूड़ा रखा जा रहा है। विभाग भी इससे बेपरवाह है। बहाना बजट का है। अफसरों का कहना है कि बजट न होने से रिफिल नहीं हो पा रहा, कोशिश जारी है।
विज्ञापन

सुप्रीम कोर्ट की सख्त हिदायतों के बाद वर्ष 2010 में सभी प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र लगाने के आदेश हुए थे। इस कार्य के लिए ग्राम शिक्षा निधि से 3600 रुपये खर्च हुआ। दो फायर एक्सटिंग्यूशर, स्टैंड सहित बालू रखने वाली चार बाल्टियां खरीदी गईं। जिले के करीब दो हजार स्कूलों में यह यंत्र लगाए गए थे। इसके बाद जिम्मेदार इसे भूल गए। फायर एक्सटिंग्यूशर को न तो रिफिल कराने पर किसी ने ध्यान दिया और न ही इसकी सुरक्षा का। नतीजा दो तिहाई से अधिक स्कूलों पर अग्निशमन की व्यवस्था भगवान भरोसे है।
जिले के स्कूलों में इन यंत्रों की मौजूदा स्थिति की पड़ताल की गई तो हालात कुछ ऐसे ही थे। नगरीय क्षेत्र में खजुरिया मोड़, तेतरी बाजार, पुरानी नौगढ़, थरौली, दतरंगवा स्थित विद्यालयों में अग्निशमन यंत्र लगे तो हैं, मगर सिर्फ शोपीस बने हैं। अधिकांश स्कूलों में फायर एक्सटिंग्यूशर की रिफिलिंग वर्षों से नहीं हुई है। कई जगह तो इसे कबाड़ में फेंक दिया गया है। मानों अध्यापक मान चुके हैं कि स्कूल में कभी भी आग की समस्या नहीं आएगी। मुख्यालय के स्कूलों में इस दशा से सुदूर ग्राम्यांचलों के स्कूलों में लगे अग्निशमन यंत्रों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
विज्ञापन

बहरहाल, इस संबंध में बीएसए अरविंद कुमार पाठक का कहना है कि वैसे तो तय समय पर फायर एक्सटिंग्यूशर की रिफिलिंग होती है, मगर इस वर्ष बजट नहीं आया है। आपने याद दिलाया है तो पता कराते हैं। आवश्यकतानुसार रिफिलिंग कराया जाएगा। जहां यंत्र नहीं लगे हैं, वहां नए यंत्रों की व्यवस्था कराई जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें