भारत नेपाल सीमा बढ़नी में वाहनोें की जांच करते एसएसबी के जवान। संवाद
सिद्धार्थनगर। नेपाल में नई सरकार आने और बालेंद्र शाह के पीएम की कुर्सी संभालने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को जेन-जी आंदोलन में हुए बवाल के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद नेपाल की राजधानी में विरोध शुरू हो गया। लोग सड़क पर उतर आए।
नेपाल में विरोध का असर सीमा पर तो नहीं दिखा, लेकिन बाॅर्डर पर चौकसी बरती जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है और हर व्यक्ति और वस्तु की एहतियात के तौर पर चेकिंग की जा रही है।
जिले की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बाॅर्डर से लगती है। यहां सीमावर्ती इलाके के दोनों तरफ के लोगों का रोजगार बाजार और कारोबार नियमित रूप से चलता है। इसके साथ ही बढ़नी, खुनुवां बाॅर्डर से ट्रेड की गाड़ियां खाद्य सामग्री आदि लेकर निकलती हैं। नेपाल में जब भी कोई हिंसा या बवाल होता है तो इसका सीधा असर बाॅर्डर पर देखने को मिलता है। जैसा जेन जी आंदोलन और बीते सप्ताह बढ़नी बाॅर्डर इलाके में सांप्रदायिक हिंसा भड़कने के बाद नजर आया था। इसकी वजह से बाॅर्डर बंद करने की नौबत आ गई थी। कई दिनों तक बाॅर्डर पर अस्थिरता का माहौल रहा। काफी मशक्कत के बाद स्थिति नियंत्रण में आई।
27 मार्च को नेपाल में बालेंद्र शाह के नेतृत्व में सरकार बनी और उनके पीएम बनने के दूसरे ही दिन शनिवार को नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री को गिरफ्तार किए जाने के बाद एक बार फिर विरोध शुरू हाे गया। उनके पार्टी के समर्थकों ने जगह-जगह प्रदर्शन किया। उनके विरोध को देखते हुए नेपाल के साथ ही भारतीय सुरक्षा एजेंसी भी अलर्ट हो गईं। हालांकि, बॉर्डर बंद करने जैसे हालात नहीं हैं, लेकिन जिले के बढ़नी, खुनुवां, बजहा, अलीगढ़वा, ककरहवा सहित अन्य छोटे मार्ग पर जांच और निगरानी तेज कर दी गई है। हर व्यक्ति और वस्तु की एसएसबी जवान जांच करते हुए नजर आए। साथ ही सीमावर्ती थाने की पुलिस भी अलर्ट मोड में रही।