सिद्धार्थनगर। किसानों को खाद की जरूरत से पहले तस्करों ने सिर उठा लिया है। मुनाफाखोरी के लिए तस्कर यूरिया और डीएपी को बाॅर्डर पार करने में जुट गए हैं। सिस्टम में सेंधमारी और किसानों से सेटिंग से खाद उठा रहे यह धंधेबाज खाद की खेप नेपाल में डंप कर रहे हैं। सीमा पर सख्ती बढ़ी तो लगातार मामले सामने आने लगे। सिर्फ जून में 106 बोरी डीएपी और यूरिया बरामद किया चुका है। अगर यही हाल रहा और दुकानों से खाद बिक्री इन हाथों में होती रही तो जरूरत पर जिले में खाद के लिए हाहाकार मचने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
जनपद की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बाॅर्डर से लगती है। सीमा पूरी तरह खुली होने के कारण बिना रोक-टोक के आवाजाही होती है। दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है। सीमा के मुख्य मार्ग पर सुरक्षा एजेंसियां निगरानी में लगी हैं। इसके साथ ही पुलिस के साथ संयुक्त मार्च भी है। तस्कर खुली सीमा का लंबे अरसे से लाभ उठाते चले आ रहे हैं। दोनों देशों में जिस वस्तु की मांग बढ़ती है, उसकी तस्करी शुरु हो जाती है।
अनाज से लेकर लेकर खाद सामग्री तक और सोने-चांदी और मादक पदार्थ तस्करी के मामले सामने आ चुके हैं। इसमें सबसे बड़ा संकट खाद की तस्करी से होता है। जब यहां से तस्करी कर खाद बाॅर्डर पार चली जाती है तो जिले में किल्लत बढ़ती है, जिससे किसानों को परेशान होना पड़ता है। बीते सालों में तस्करी के अनगिनत मामले सामने आए। बाॅर्डर की दुकानों को सील किया गया। तस्करी को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कमेटी भी गठित की गई है। इन्हें समितियों में बिक्री का लेखाजोखा लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी लेकिन जून माह में बाॅर्डर पर जो तस्करी के मामले में पकड़ में आए हैं, वे यह बता रहे हैं कि सबकुछ सही नहीं है।