सिद्धार्थनगर। यूपी बोर्ड की परीक्षा के लिए केंद्र बनाने में गड़बड़ी सामने आने लगी है। मनमाने ढंग से कागज में विद्यालयों के कमरों की संख्या बढ़ा दी गई। नतीजा स्कूलों में क्षमता से दोगुने परीक्षार्थी आवंटित कर दिए गए। कागजी खेल कर ऐसे कई विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। अब इन स्कूलों पर परीक्षा के सकुशल संचालन की चुनौती बन गई है।
शासन ने सत्र 2017-18 में यूपी बोर्ड परीक्षा संपंन कराने के लिए गाइड लाइन जारी किया था। केंद्र निर्धारण में राजकीय व अशासकीय विद्यालयों को वरीयता देने का निर्देश दिया, लेकिन विभागीय मनमानी के आगे गाइडलाइन को दरकिनार कर दिया गया। इटवा स्थित माता प्रसाद जायसवाल इंटर कॉलेज व ललिता इंटर कॉलेज चौखड़ा को तीन दशक से केंद्र बनाया जा रहा है। अब उन्हें भी नजरअंदाज कर दिया गया। विगत कई वर्षों से इन विद्यालयों को सकुशल परीक्षा संपन्न कराने के लिए प्रशस्ति पत्र मिलता आ रहा है। नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए चर्चित सेंट थामस स्कूल हल्लौर को भी छांट दिया।
नियम कानून को ताक पर रख 14 वित्तविहीन विद्यालयों को केंद्र बना दिया। इस संबंध में डीआईओएस डॉ. राज बहादुर मौर्या ने कहा कि केंद्रों का निर्धारण मानक के अनुसार किया गया है। जिले में जांच के बाद टीम ने जो सूची दी थी, उसी आधार पर परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए हैं। कई वित्तविहीन विद्यालयों को हटाने के बाद मात्र 24 को ही परीक्षा केंद्र बनाया गया है। परीक्षा को संपन्न कराने के लिए विभाग कटिबद्ध है।