संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। मेडिकल कॉलेज में हृदय रोग के मरीजों के लिए इको जांच की सुविधा नहीं है। इससे मरीजों को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज का चक्कर लगाना पड़ता है, जहां अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। इससे मरीजों को लंबी दौड़ के साथ असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में कॉर्डियो के डाॅक्टर नहीं है, इससे मरीजों को निजी अस्पताल में जाना पड़ता है, जबकि कई मरीज मेडिसिन वार्ड में इलाज करवाते हैं, मेडिकल कॉलेज में ह्रदय की जानकारी के लिए ईसीजी की सुविधा तो है, लेकिन कई बार रिपोर्ट में संशय होने पर डॉक्टर इको जांच भी लिख देते है, ऐसे में मरीजों को गोरखपुर का ही चक्कर लगाना व निजी अस्पताल में जाना मजबूरी हो जाती है।
मेडिसिन में आम दिनों में हार्ट के पांच से छह मरीज ही आते हैं, लेकिन सर्दी के मौसम में यह आंकड़ा 25 से 30 करीब पहुंच जाता है, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं ओपीडी में आने वाले मरीजों का चिकित्सक परीक्षण करते हैं। हार्ट में दिक्कत मिलने पर ईसीजी व एक्स-रे कराया जाता है। जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने पर मरीज को इको की जरूरत होती है, लेकिन अस्पताल में इको जांच के इंतजाम नहीं हैं। इससे मरीजों को सुविधा नहीं मिल रही है। ऐसे में मरीजों को मजबूरी में रेफर कर दिया जाता है तो कुछ मरीज मजबूरन प्राइवेट सेंटरों से जांच कराते हैं, जिससे उनपर आर्थिक बोझ पड़ता है।