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बंद हुए जिले के 82 निजी अस्पताल, मरीजों की परेशानी बढ़ी....

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जिले के 82 निजी अस्पताल बंद, बढ़ी परेशानी
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सीएमओ कार्यालय से मात्र छह प्राइवेट अस्पतालों ने ली अनुमति
कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव को उठाया गया कदम
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। लॉकडाउन के दौरान स्वास्थ्य विभाग की अनुमति के बिना संचालित 82 निजी अस्पतालों को जिला प्रशासन ने बंद करने का आदेश जारी किया है। इन अस्पतालों ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोविड-19 का प्रशिक्षण नहीं लिया है।
जिले मेें मात्र छह अस्पतालों ने ही लॉकडाउन के दौरान चिकित्सा सेवाएं देने के लिए स्वास्थ्य विभाग से अनुमति प्राप्त की है। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न होने की आशंका के मद्देनजर डीएम ने जिले के निजी चिकित्सालयों को बिना अनुमति के संचालन पर तत्काल रोक लगा दी है। इस निर्णय के बाद जनपद के 82 निजी चिकित्सालय बंद हो गए हैं। जिन प्राइवेट हास्पिटल ने सीएमओ कार्यालय से अनुमति ली है, उनमें वीपीएल हास्पिटल, अपोलो हास्पिटल, वात्सल्य हास्पिटल, पाठक हास्पिटल, फात्मा हास्पिटल एवं शोहरतगढ़ स्थित अशरफ मेमोरियल हास्पिटल शामिल हैं।
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मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. सीमा राय ने बताया कि कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के चलते सतर्कता की दृष्टि से फैसला लेना पड़ा है। यदि कोई प्राइवेट चिकित्सक अपना अस्पताल संचालित करना चाहता है तो उसे विभाग की ओर से कोविड-19 के बारे में प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।
इलाज के लिए भटकते रहे मरीज
शुक्रवार को अचानक अधिकांश प्राइवेट अस्पतालों के बंद होने से पूरेे जिले में इलाज कराने पहुंचे मरीजों और तीमारदारों को भटकना पड़ा। जानकारी वाले सभी चिकित्सालयों में दौड़ लगाते रहे, पर उन्हें निराश लौटना पड़ा। सर्वाधिक परेशानी शुगर और बीपी चेक कराने वालों को हुई। लोटन क्षेत्र से अपने पुत्र का इलाज कराने के लिए एक प्राइवेट अस्पताल पर दोपहर दो बजे बाद पहुंचे राम लौटन ने बताया कि इलाज के लिए जिला अस्पताल बंद होने पर प्राइवेट हास्पिटल ही सहारा था। शनिवार को जिला अस्पताल लाएंगे।
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संचालकों का अलग ही तर्क
नाम न छापने की शर्त पर जिले के कई प्राइवेट चिकित्सक एवं संचालकों का कहना है कि जब विभाग में उनके हास्पिटल पंजीकृत हैं और सारी औपचारिकताएं पूरी करने पर ही अनुमति मिली है। इसके बाद भी ऐसा निर्णय समझ से परे है।
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