बांसी में निजी बस से सामान उतारते लोग। संवाद
सिद्धार्थनगर। राजस्थान के जैसलमेर में हुए बस हादसे में 20 यात्री जिंदा जल गए। कई घायल हैं। इसमें पटाखा रखे होने के संकेत पुलिस की जांच में मिले हैं। यहां भी इस प्रकार की लापरवाही बरती जाती है। बस में चंद रुपये के लिए बिना जांच पड़ताल के बोरी और गत्ता बंद सामान चालक रख ले रहे हैं। उसमें क्या है, इससे कोई लेना देना नहीं है।
राजस्थान हादसे के बाद निजी और सरकारी बसों की पड़ताल की गई। इस दौरान निजी बसों में बड़ी अनियमिता सामने आई। न तो फायर सिलिंडर मिला और खिड़की जाम मिली। इसके साथ ही लांग रूट की बसों से गत्ता बंद और बोरा बंद सामान उतारते हुए देखा गया।
इसमें जब चालक परिचालक से जानकारी ली गई तो वह ये नहीं बता सकें कि इसमें क्या है। बस रुपये मिलने पर लाकर बताए हुए प्वाइंट पर छोड़ देने की बात कही।
न फायर सिलिंडर मिला न खुल रही थी खिड़की : हादसे को देखते हुए सुरक्षा के इंतजाम और कितनी सतर्कता बरती जा रही है इसकी हकीकत जानने के लिए सबसे पहले सिद्धार्थनगर डिपो पहुंचा। यहां जाने के लिए रूट पर खड़ी और कुछ अंदर खड़ी बसों को देखा गया तो उसमें फायर सिलिंडर और मेडिकल किट नहीं मिले। कुछ की खिड़कियां भी नहीं खुल सकीं। रोडवेज के एक परिचालक ने बताया कि करीब सभी नई बसें आई हैं। पिछले कुछ साल में लगातार खराब बस को बदल दिया जाता है। साथ ही समय-समय पर चेक किया जाता है। इसलिए कभी कभार ही समस्या आती है। बांसी और ककरहवा जाने वाले स्टैंड पर भी यही हाल मिला।