सिद्धार्थनगर/बांसी। पॉलीथिन के इस्तेमाल पर भले ही रोक का फरमान जारी हो चुका है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा। न लोग पॉलीथिन के इस्तेमाल से तौबा कर रहे हैं और न ही प्रशासन कोई सक्रियता दिखाने की जरूरत समझ रहा। नतीजा प्रदूषण फैलाने वाले पॉलीथिन धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहे हैं।
पर्यावरण को प्रदूषित करने में पॉलीथिन को बड़ा कारण माना गया है। इसके आधार पर देश में पॉलीथिन के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी गई है। शुरुआती दौर में प्रशासन खुद सक्रिय रहा। जगह-जगह अभियान चलाकर छानबीन की गई, लेकिन समय के साथ यह फरमान ठंडे बस्ते में चला गया है। जिले की सदर और बांसी नगर पालिका क्षेत्र में आदेश पूरी तरह बेअसर है। पॉलीथिन के साथ कूड़े के निस्तारण की व्यवस्था न होने से पूरा नगर प्रदूषण की गिरफ्त में है। घनी आबादी के लोग दुर्गंध व गंदगी के बीच जीने को मजबूर हैं। नगर में प्रतिदिन निकलने वाले कूड़े के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे प्रदूषण की समस्या विकराल होती जा रही है।
बांसी नगर निवासी पूर्व सांसद डॉ. चंद्रशेखर त्रिपाठी का कहना है कि पॉलीथिन प्रदूषण की जननी है। गोरखपुर के साथ इस जनपद में भी पॉलीथिन के प्रयोग पर प्रतिबंध लगना चाहिए। नगर में निकलने वाले कूड़े के निस्तारण की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नगर में निकलने वाले कूड़े को सड़क के किनारे या गड्ढे पोखरे में पाटा जा रहा है, जिससे होने वाले प्रदूषण से लोगों का सांस लेना दुश्वार हो रहा है।
नगर निवासी विजय वर्मा का कहना है कि नगर में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए यहां भी पॉलीथिन के प्रयोग पर रोक लगना चाहिए। उधर, इस बाबत सदर एसडीएम विनीत कुमार उपाध्याय का कहना था कि पॉलीथिन पर रोक संबंधी गाइड लाइन की जानकारी नहीं है। इस बारे में पता कर उसका पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।