दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण से प्रशासन अलर्ट
मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर दिए निर्देश
डीएम ने सभी एसडीएम, बीडीओ को भेजा पत्र, हिदायत
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। प्रदूषण से दिल्ली-एनसीआर का क्षेत्र परेशान है। इसकी वजह से कई प्रदेशों की आबोहवा और दमघोंटू व जहरीली हो गई है। इससे अलर्ट रहने के लिए शासन के पत्र पर मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
बस्ती मंडल के आयुक्त अनिल कुमार सागर ने डीएम को पत्र भेजकर अवगत कराया है कि भारत सरकार द्वारा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र को प्रदूषण के कारण हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। इसका मुख्य कारण पंजाब व हरियाणा में पराली, फसल अवशेष को जलाना बताया जा रहा है। बीते दिनों से वायु प्रदूषण की स्थिति में सुधार हुआ, पर अब भी वायु प्रदूषण का स्तर काफी खतरनाक है। ऐसे में कई बिंदुओं पर एहतियात बरतने की आवश्यकता है। कमिश्नर ने जिन बिंदुओं पर अलर्ट रहने की हिदायत दी है, उनमें प्रत्येक सप्ताह जिला पर्यावरण समिति की बैठक करने, शहरों, कस्बों व गांवों में कूड़ा जलाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की नियमित चेकिंग, जिले में संचालित उद्योगों का निरीक्षण कर वायु अथवा जल प्रदूषण पर गहनता से छानबीन करने, लोक निर्माण विभाग द्वारा मिट्टी का कार्य फिलहाल बंद कराने, जनपद में निर्माणाधीन भवनों के स्वामियों को प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों को पर्याप्त रूप से ढककर रखने के लिए हिदायत देने, कंबाइन मशीन का प्रयोग बिना स्ट्रा रिपर के संचालन न करने, पराली जलाने पर लेखपालों को उत्तरदायी बनाने, विद्युत आपूर्ति की निरंतरता बनाए जाने, जेनरेटर का उपयोग कम करने पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने सभी एसडीएम, बीडीओ को आवश्यक कार्रवाई के लिए हिदायत दी है।
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अब धान की पराली जलाने वालों की खैर नहीं
बिना रिपर के मशीन चलाने पर होगी कार्रवाई, तीन ब्लॉक स्तरीय तीन टीमें गठित
अमर उजाला ब्यूरो
बांसी। अब पराली (धान का पुआल) जलाने वालों की खैर नहीं है। पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए शासन के निर्देश पर स्थानीय प्रशासन सख्त हो गया है। पराली जलाने पर अंकुश लगाने व ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए एसडीएम शिवमूर्ति सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को तहसील कार्यालय में जिम्मेदार अधिकारियों की बैठक हुई।
इस दौरान तहसील क्षेत्र के तीनों ब्लॉकों में एक सचल दस्ता बनाया गया, जो निगरानी करेगा। एसडीएम शिवमूर्ति सिंह ने कहा कि बढ़ते हुए प्रदूषण को रोकने के लिए शासन के निर्देशों का सख्ती से पालन होना चाहिए। इस दौरान एसडीएम ने कहा कि फसलों की कटाई के समय कंबाइन में स्ट्रा चाफर अनिवार्य रूप से लगा होना चाहिए। किसानों को बताया जाए कि फसल की कटाई के उपरांत पानी चलाकर वेस्ट डिकम्पोज का छिड़काव किए जाने पर फसल का अपशिष्ट नष्ट हो जाता है या 10 किलो ग्राम यूरिया प्रति एकड़ खेत की जुताई के समय भराई करते समय डालने से फसल का अपशिष्ट नष्ट हो जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसा न करने वालों पर कार्रवाई की जाए। इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में सीओ नईम खान मंसूरी, तहसीलदार अरुण कुमार वर्मा, एडीओ कृषि बांसी, मिठवल, खेसरहा व सभी राजस्व निरीक्षक मौजूद थे।
निगरानी के लिए बनाई गईं टीमें
बांसी। आदेश का अनुपालन किए जाने के लिए तहसील क्षेत्र के तीनों विकास खंड के लिए तीन सदस्यी तीन अलग-अलग टीमें बनाई गईं है जो क्षेत्र में भ्रमण कर पराली जलाने वालों पर निगाह रखेंगी। विकास खंड बांसी के लिए बनाई गई टीम के प्रभारी बीडीओ बांसी हैं और इस टीम में एडीओ कृषि व कोतवाल बांसी शामिल हैं। मिठवल टीम के प्रभारी बीडीओ मिठवल तथा इसके सदस्य एडीओ कृषि व पथरा थानाध्यक्ष हैं। इसी तरह खेसरहा टीम के प्रभारी तहसीलदार बांसी व इसके सदस्य एडीओ कृषि व थानाध्यक्ष खेसरहा हैं।
कंबाइन सीज किया गया
बांसी। बढ़ते हुए प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए शासन के निर्देशों का पालन करते हुए सोमवार को एसडीएम शिवमूर्ति सिंह व सीओ नईम खान मंसूरी ने बांसी थाना क्षेत्र के जीवां के पचपेड़वा चौराहे पर कंबाइन को सीज किया। इस कंबाइन में शासनादेश के अनुसार हार्वेस्टर मशीन स्ट्रा चाफर बाइंडर का प्रयोग नहीं किया जा रहा था। इसलिए मौके पर पहुंचकर दोनों अधिकारियों ने कंबाइन को सीज कर दिया। यह कंबाइन गुरप्रीत सिंह पुत्र प्यारा सिंह निवासी सोहावी जिला फत्तेगढ़, पंजाब की है।
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फसल अवशेष प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया
पर्यावरण सुरक्षा के साथ किसान सुधार सकते हैं सामाजिक व आर्थिक दशा
कृषि विज्ञान केन्द्र सोहना में इन सीटू फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आयोजित हुआ प्रशिक्षण
अमर उजाला ब्यूरो।
मन्नीजोत। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में सोमवार को चयनित ग्राम सिकटा के 25 किसानों के प्रशिक्षण की शुरुआत की गई। किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया।
यहां इन सीटू फसल अवशेष प्रबंध में केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एलसी वर्मा ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह है कि धान का पुआल जलाया ना जाए, ताकि वातावरण को सुरक्षित रखा जा सके व भूमि की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाया जा सके। कहा गया कि इस विषय में नीति निर्धारकों, वैज्ञानिकों, उद्योगपतियों, पर्यावरण विधि व किसानों को मिल-जुलकर काम करना होगा। इन फसल अवशेषों का उपयोगी वस्तुओं के लिए इस्तेमाल किया जाए। कहा कि हम किसानों को सामाजिक-आर्थिक दशा सुधारने में भी सफल होंगे। कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि धान की एक टन पराली जलाने से लगभग तीन किलोग्राम धूल कण, 60 किलोग्राम कार्बन मोनोऑक्साइड, 1407 किलोग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड, 199 किलोग्राम राख तथा दो किलोग्राम सल्फर डाईऑक्साइड निकलते हैं। यह सभी पर्यावरण को खराब करते हैं तथा स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालते हैं। ऐसी परिस्थितियों में कम लागत व पर्यावरण हितैषी फसल अवशेष प्रबंधन तकनीकी विकसित करने तथा उन्हें किसानों में लोकप्रिय बनाने की अति आवश्यकता है। धान की फसल के अवशेष को जैविक ईंधन, कंपोस्ट, मशरूम उत्पादन, ब्रीकेट्स, बॉयोचार, पशु चारे आदि के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीपी सिंह ने फसल अवशेष के समुचित प्रबंधन के लिए तकनीकी विकल्प पर चर्चा की और साथ में डॉ. एसके मिश्रा ने खेत में ही अवशेषों के इस्तेमाल पर प्रकाश डाला और कहा कि धान की पराली न जलाएं, इससे मिट्टी की स्वास्थ्य के साथ-साथ हमारे रहन-सहन पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। कृषि विशेषज्ञ मौसम विभाग के सूर्य प्रकाश सिंह ने समय-समय पर कब और कैसे कृषि से संबंधित कब क्या करना है के बारे में किसानों को अवगत कराया। नीलम सिंह ने भी धान का पुआल ना जलानेेेे के बारे में कृषकों को अवगत कराया। प्रशिक्षण में प्रगतिशील किसान भवानी प्रसाद, राज कुुमार, देवी प्रसाद सिंह, धर्म प्रकाश सिंह आदि मौजूद रहे।
किसानों को बताए खेती के गुर
इटवा ब्लॉक के मुड़िला चंदनराय गांव में आयोजित हुई चार दिवसीय किसान पाठशाला
अमर उजाला ब्यूरो
इटवा। ब्लॉक क्षेत्र के मुड़िला चंदनराय गांव में सोमवार को चार दिवसीय किसान पाठशाला का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को खेती के गुर बताए गए। सहायक तकनीकी प्रबंधक अखिलेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि रबी सीजन की शुरुआत से पूर्व मृदा परीक्षण कराएं और उसी के अनुसार दी गई सलाह के अनुरूप उर्वरक का प्रयोग करें। उन्होंने किसानों को प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुरूप किसानों की आय दोगुनी करने के सूत्र बताए और इसे अपनाने की सलाह दी और साथ ही किसान सम्मान निधि, किसान मानधन योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, रबी सीजन की उन्नतशील फसलों आदि के बारे में जानकारी दी। इस अवसर पर ग्राम प्रधान त्रिपाठी बाल विनोद भाई, धनीराम, विनय कुमार, अमित श्रीवास्तव, बुधिराम, नंद कुमार, रवि चौधरी, हरिश्चंद्र, लक्ष्मण यादव आदि मौजूद रहे।