सिद्धार्थनगर। पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा शनिवार को जिले के 22 केंद्रों पर दो पाली में हुई। परीक्षा में शामिल होने के लिए आए 21082 परीक्षार्थियों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। उन्हें बस और ट्रेन में चढ़ने के साथ ही ठहरने के लिए भी परीक्षा देनी पड़ी। परीक्षार्थी परीक्षा से छूटे तो जाम और रोडवेज और रेलवे स्टेशन तक पहुंचने और वहां बैठने के लिए जद्दोजहद करना पड़ा। जिन बच्चों को जनपद मुख्यालय पर केंद्र था, उन्हें तो रेलवे और बस स्टेशन पहुंचने में दिक्कत नहीं हुई। लेकिन जिनका केंद्र मुख्यालय से दूर इटवा, डुमरियागंज और बांसी तहसील क्षेत्र में चल गया, उन्हें आने-जाने में बड़ी समस्या हुई। प्रशासन की ओर सेे ठहराव का इंतजाम न किए जाने से बच्चों को हर क्षण परेशानी से गुजरना पड़ा।
पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा शनिवार को जिले के 22 परीक्षा केंद्रों पर सुबह 10 से दोपहर 12 बजे और दोपहर तीन से शाम बजे दो पाली में हुई। दोनों पाली में 23376 बच्चों को बैठना था। एक पाली में 11688 बच्चों को शामिल होना था। देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, बस्ती, बलरामपुर जनपद के जिन परीक्षार्थियों की परीक्षा यहां होनी थी वे रात में ही जिले में पहुंच गए।
दोपहर 12 बजे शहर के विद्यापीठ डिग्री कॉलेज परीक्षा छूटने के बाहर निकले कुशीनगर बुदहट निवासी रमेश यादव ने बताया कि शुक्रवार सुबह ही घर से निकले थे। ट्रेन से गोरखपुर आए, फिर ट्रेन पकड़कर सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन पहुंचे। ठहरने की कोई व्यवस्था नहीं थी। प्लेटफाॅर्म पर रात कटी, हर कदम पर परेशानी झेलनी पड़ी।
देवरिया के सलेमपुर के रहने वाले रोहित त्रिपाठी ने कहा क परीक्षा से पहले ही दुश्वारियों की ट्रेनिंग हुई। हर कदम पर परेशानी हुई। इसी प्रकार अन्य युवाओं ने दर्द बयां किया।
परिक्षार्थियों को रात बिताने की जगह नहीं मिली
परीक्षा केंद्र तिलक इंटर कॉलेज बांसी में शनिवार को पुलिस भर्ती की परीक्षा देने आए परीक्षार्थियों ने बताया कि उन्हें काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा है। कुशीनगर जनपद से आये भीम विश्वकर्मा ने बताया कि वह रात मे ही बांसी पहुंच गए थे। लेकिन यहां पहुंचने के बाद रात बिताने के लिए कोई जगह नहीं मिली। पूरी रात रोडवेज चौराहे के पास भूखे पेट बिताना पड़ा। इसी तरह देवरिया से आये शिवेंद्र यादव ने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वह भी शुक्रवार की देर रात बांसी पहुंच गये थे। किसी तरह जागकर रात बिताया और सुबह परीक्षा में बैठ गया। देवरिया से आए राजीव रंजन ने बताया कि हमारे लिए बांसी नयी जगह थीं। मैं कभी इधर नहीं आया था। इसलिए शुक्रवार को ही घर से निकलकर यहां चला आया और काफी तलाश करने के बाद होटल व लाज में ठहरने की व्यवस्था नहीं मिली।
माता प्रसाद जायसवाल इंटर कॉलेज इटवा, यशोदा देवी कन्या इंटर कॉलेज इटवा व अलफारूक इंटर कॉलेज इटवा परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इनमें माता प्रसाद जायसवाल इंटर कॉलेज में परीक्षा देने आए देवरिया जनपद के रवि ने बताया कि शुक्रवार दोपहर में घर से निकले थे। यहां देर शाम कस्बे में पहुंच गए। कस्बे के एक लाज में ठहरने के लिए जानकारी की। यही हाल कुशीनगर से आये चंदन निगम का था। देवरिया के बबलू यादव बताते हैं कि चार पहिया वाहन से आया था। परीक्षा के पहले का समय वाहन में ही सोकर बिताए। परीक्षा के सवाल पर इन सभी ने पेपर बढिय़ा रहा कहा।
परीक्षा से छूटे तो जाम ने पैर को जकड़ा
परीक्षा से छूटने के बाद बच्चे घर भागने के लिए आगे बढ़ने लगे। तो स्टेशन रोड पर जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। सड़क की चौड़ाई कम होने के कारण बड़े वाहनों के घुस जाने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। जाम के कारण बच्चों को परेशानी महसूस हुई। लेकिन जाम अधिक समय तक नहीं रहा। कारण करीब में रेलवे स्टेशन और रोडवेज होने के कारण तीनों परीक्षा केंद्र बुद्ध विद्यापीठ डिग्री कॉलेज, सिंहेश्वरी इंटर कॉलेज और बाल शिक्षा सदन इंटर कॉलेज के बच्चे देखते ही देखते ही पहुंच गए। इसलिए बहुत देर रात जाम की स्थिति नहीं रही।
केंद्रों पर रही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था किया गया था। गेट के आसपास सुरक्षाकर्मी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। शहर में जाम न लगने पाए। इसके मद्देनजर मुख्य मार्गों पर पुलिस तैनात कर दी गई थी। जो परीक्षा छूटने से पहले ही अलर्ट हो गई थी। शहर में भारी वाहनों को रोकना शुरू कर दिया दिया था। सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम हर परीक्षा केंद्रों पर रहा।