बरेली के गिरोह पकड़े जाने के बाद पुलिस हुई सतर्क
ठंड के मौसम में बाहर से आकर फेरी लगाने और अन्य धंधा करने वालों का ब्योरा जुटा रही पुलिस
सबसे खतरनाक बावरिया गिरोह का कभी ठिकाना रहा सिद्धार्थनगर
सिद्धार्थनगर। बरेली गिरोह के पकड़े जाने के बाद पुलिस सतर्क हो गई है। अब फेरी लगाकर सामान बेचने, कबाड़ खरीदने वाले, भिखारियों, घुमंतू, झुग्गी बस्तियों में रहने वालों की कुंडली खंगालने में जुट गई है। इन सभी का ब्योरा जुटाकर रजिस्टर तैयार कर रही है। ताकि घटना होने पर ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई की जा सके।
ठंड के साथ चोरी व लूट की घटनाएं बढ़ जाती हैं। वहीं, शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में फेरी लगाकर सामान बेचने, कबाड़ खरीदने वालों और झुग्गी बस्तियों की संख्या में भी इजाफा होता है। अक्सर इस तरह के काम करने वाले ही दिन में रेकी कर रात में घटनाओं को अंजाम देते हैं। हाल के दिनों में सदर, बांसी, कठेला समय माता थाना और डुमरियागंज, इटवा थाना क्षेत्र में चोरी की वारदात हो चुकी है।
कभी बावरिया गिरोह का प्रमुख ठिकाना था
घुमंतू गिरोह ठंड के मौसम में काफी सक्रिय हो जाते हैं। सिद्धार्थनगर कभी देश के सबसे बड़े घुमंतू गिरोह बावरिया का प्रमुख ठिकाना रहा है। बावरिया गिरोह ठंड शुरू होने के साथ ही जिले में घूम-घूम कर वारदात को अंजाम देता था। आठ साल पहले ढेबरुआ थाना क्षेत्र के बढ़नी कस्बे में स्थित मिल कॉलोनी में एक घर में गिरोह ने डकैती डाली थी। इसमें दंपति और एक युवक की बेरहमी से पिटाई कर दी थी। घटना में दंपति की मौत हो गई थी। गिरोह के 10 लुटेरों को पुलिस ने पकड़ा था। उन्होंने जनपद में कई वारदात करने की बात स्वीकार की थी। अभी 10 दिन पहले इस गिरोह के सभी सदस्यों को आजीवन कारावास की सजा हुई है। इधर एक बार फिर बाहरी गैंग फिर जनपद में सक्रिय हो गया है। जिसका प्रमाण 5 दिन पहले पकड़े गए बरेली गैंग के शातिर बदमाश हैं।
बरेली गिरोह ने खोली पुलिस की आंख
बरेली गिरोह के पकड़े जाने के बाद पुलिस की आंख खुल गई। पुलिस को इस बात की पुष्टि हो गई कि गैर जनपद का गिरोह सक्रिय है। ये चोरी व लूट की घटनाओं को अंजाम देकर निकल जाते हैं। इसके कारण घटनाओं का खुलासा करने में दिक्कतें हो रही है। बरेली के गिरोह ने कोतवाली के थुम्हवा गांव में और डुमरियागंज के बनगाई गांव में सात घरों में चोरी की घटना को अंजाम दिया। यह गिरोह बरेली से आकर रेलवे स्टेशन व आसपास के स्थानों पर ठिकाना बनाकर रेकी करता था। इसके बाद घटना को अंजाम देता था। इस इनपुट के बाद पुलिस की आंख खुल गई। अब अधिकारियों ने भी ऐसे लोगों का रिकार्ड रखने का निर्देश दिया। इसके बाद से पुलिस ने फेरी लगाकर कपड़ा बेचने, कबाड़ खरीदने, भिखारियों और झुग्गी बस्तियों में रहने वालों के आधार कार्ड, फोटो व अन्य पहचान पत्र की प्रतियां जुटानी शुरू कर दी हैं।
अब तक हुई 20 से अधिक चोरी की घटना
जनपद में दिसंबर माह में चोरी की 20 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें कठेला समय माता थाना क्षेत्र में आठ चोरी, इटवा में एक, डुमरियागंज और बांसी में सात, सदर में छह कर चोरी की वारदात हो चुकी है। चोरियों से जिले के लोग दहशत में हैं।
बाहर से आकर फेरी लगाने वाले व अन्य काम करने वालों के बारे में सभी थाने की पुलिस जानकारी ले रही है। उनका पूरा ब्योरा जुटाया जा रहा है। इससे कोई बाहरी व्यक्ति घटना करता है तो उसे आसानी से पकड़ा जा सकेगा।
-अभिषेक कुमार अग्रवाल पुलिस अधीक्षक