राजकीय बौद्ध संग्रहालय पिपरहवा में बुधवार को संग्रहालय दिवस के अवसर पर प्राचीन स्मारकों पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। यह प्रदर्शनी 27 मई तक जनसामान्य के अवलोकनार्थ खुली रहेगी।
प्रदर्शनी में भारतीय स्थापत्य कला की विविध शैलियों नागर, द्रविण एवं बेसर शैली के मंदिर एवं स्थापत्य की उत्कृष्ट कृतियों को छायाचित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। इसके अलावा प्राचीन, मध्यकालीन व आधुनिक कला के उन स्मारकों एवं पुरास्थलों को प्रदर्शित किया गया जो विश्व विरासत की श्रेणी में आते हैं।
प्राचीन स्मारकों व पुरास्थल में अजंता, एलोरा, एलीफैंटा, भाजा की गुफा, महाबलीपुरम, सांची, सारनाथ, कुशीनगर, नागार्जुनकोंडा, खजुराहो एवं कोणार्क और मध्यकालीन स्मारकों में संरचनात्मक शैली के स्थापत्य कला का प्रदर्शन हुआ।
इससे पूर्व प्रदर्शनी का उद्घाटन सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के उप कुलसचिव महेंद्र कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनियां ज्ञान के प्रसार का सशक्त माध्यम होती हैं। संग्रहालय द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी में प्राचीन, मध्यकालीन व आधुनिक वास्तुकला से संबंधित छायाचित्रों के माध्यम से प्रदर्शन कर निश्चित रूप से जनसामान्य को लाभान्वित करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।
अंत में संग्रहालय पतरू ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए उपस्थित लोगों को प्रदर्शनी में हिस्सा लेने के लिए धन्यवाद दिया। कहा कि प्रदर्शनी लगाने का मूल उद्देश्य जनसामान्य व बच्चों को राष्ट्रीय महत्व के गौरवपूर्ण ऐतिहासिक स्मारकों एवं पुरास्थलों के बारे में जानकारी देना और उन्हें संरक्षित व स्वच्छ रखने में सहयोग करने की अपील करना है।
इस दौरारन परीक्षा नियंत्रक सिद्धार्थ विश्वविद्यालय अखिलेश पाल, भंते रतन सागर, बुद्ध रतन, आनंद सागर, चंद्रभूषण तिवारी, जितेंद्र, विनोद कुमार, अजय कुमार, धर्मेंद्र कुमार दूबे, रिजवान खान आदि मौजूद रहे।