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Siddharthnagar News: परमिशन ना राॅयल्टी, खनन माफिया ने बेच दी करोड़ों की मिट्टी

Fri, 09 Jun 2023 12:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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उसका क्षेत्र के छितरापार बांध को काटकर खनन माफियाओं ने बनाया रास्ता। संवाद
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सिद्धार्थनगर। जनपद में खनन माफिया सक्रिय हैं। बिना परमिशन और रॉयल्टी के ही ये नदियों और बांध की कोख को छलनी कर रहे हैं। सरकारी जमीन का भी खनन कर एक तरफ तो सरकार को राजस्व की चपत लगा रहे हैं। वहीं, खनन में लगी ट्रैक्टर-ट्रालियां सड़कों पर यमराज का रूप धर दौड़ती हैं। आए दिन इनकी चपेट में आकर लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। मिट्टी खनन का धंधा अक्सर रात में ही होता है। इस दौरान अगर कोई माफिया के वाहनों के सामने आता है तो वे वाहन चढ़ाने से भी परहेज नहीं करते। इनकी बेखौफ दौड़ से जिले में कई लोगों की जानें जा चुकी हैं। जब कोई शिकायत करता है तो प्रशासनिक अमला हरकत में आता है और ताबड़तोड़ कार्रवाइयां शुरू हो जाती हैं। जैसा की बीते 15 दिनों में अलग-अलग थाना क्षेत्रों में देखने को मिला है।
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गेहूं की कटाई की समाप्ति के बाद हर तरफ आने-जाने का रास्ता हो जाता है। अप्रैल से जून तक यानी तीन माह के बीच कोई कहीं भी कितना बड़ा वाहन लेकर जाए, उसे दिक्कत नहीं होती है। फिर शुरू होता है मिट्टी और बालू खनन का काला कारोबार। जिले का शायद ही कोई हिस्सा हो, जहां यह रात के अंधेरे में यह धंधा न हो रहा हो। कहीं बांध के किनारे टीला तो कहीं सरकारी पशुचर, जलधर और तालाब में मिट्टी खनन का कार्य शुरू हो जाता है। जैसा की इस वर्ष हो रहा है। 15 दिन में प्रशासन की ओर से की गई चार कार्रवाई यह साबित करने के लिए काफी हैं कि बिना परमिशन और रायल्टी जमा किए मिट्टी खनन हो रहा है। कारण पकड़े गए किसी भी व्यक्ति के पास खनन से संबंधित कोई कागजात नहीं मिला। करीब दो माह में करोड़ों की मिट्टी खनन माफिया ठिकाने लगा चुके हैं। इससे जहां राजस्व का नुकसान हो रहा है। वहीं, सरकारी भूमि पर गड्ढा और बांध के पास खनन से बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है।
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खनन के लिए बांध काटकर बना दिया रास्ता
उसका थाना क्षेत्र के छितरापार गांव के पास से बूढ़ी राप्ती नदी गुजरती है। यह बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र है। हर वर्ष बाढ़ के सीजन में बांध टूटने का खतरा मंडराता है। इसके बाद भी खनन माफिया की निगाह नदी की बलुई मिट्टी पर गड़ी हुई है। मिट्टी माफिया ने बांध को काटकर लोडर जाने का रास्ता बना दिया। कई दिनों तक खनन जारी रहा। कई बार लोगों ने सूचना दी। मामला तूल पकड़ता देख प्रशासन हरकत में आया और ट्रैक्टर-ट्रॉली और जेसीबी सीज की थी।
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ईंट भट्ठे के लिए स्टोर होती है मिट्टी
सूत्रों के अनुसार सालभर ईंट की पथाई चल सके। इसके लिए ईंट भट्ठों पर मिट्टी का पहले ही इंतजाम किया जाता है। अधिकांश स्थानों पर मिट्टी खनन करके माफिया इसे ईंट भट्ठे पर पहुंचा देते हैं। ज्यादातर मिट्टी सरकारी भूमि और बांध के आसपास से खुदाई कर लाई जाती है। -
पहले लेते हैं पुलिस से लाइन
नाम नहीं छापने की शर्त पर एक व्यक्ति ने बताया कि उसे अपने खेत से मिट्टी खुदाई करवाकर घर में डलवानी थी। ट्रैक्टर वालों से बात की। इसके बाद प्रशासन से परमिशन भी मिल गई। लेकिन कागज होने के बाद भी ट्रैक्टर वाला तैयार नहीं हुआ। उसने कहा कि इस कागज का कोई मतलब नहीं है। हल्के के दरोगा साहब और सिपाही साहब से बात करेंगे, वह लाइन देंगे। उनकी मर्जी से ही मिट्टी ले जाए पाएंगे। अगर पटवाना है तो कुछ रुपये और दो, साहब को दे देंगे। इसके बाद चिंतामुक्त होकर काम करेंगे।
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जल्दी गिराने के चक्कर में तेज चलाते हैं वाहन
अधिक से अधिक ट्रॉली मिट्टी गिरा लें और किसी की नजर में आएं भी न। इसलिए ट्रैक्टर-ट्रॉली वाले तेज गति से वाहन चलाते हैं। अगर कोई सामने आया और खुद नहीं संभलता तो चपेट में लेने से भी नहीं चूकते हैं। जैसा की पूर्व के हादसों में हो चुका है।
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मिट्टी लदी ट्रॉली से लगी टक्कर, कुचलकर युवक की मौत
इसी वर्ष 26 अप्रैल को शोहरतगढ़ कस्बे में मिट्टी लदी ट्रैक्टर-ट्राली ने चिल्हिया थाना क्षेत्र के मुडिला बुजुर्ग गांव निवासी दीपक दुबे को चपेट में ले लिया। इस हादसे में दीपक की मौत हो गई थी। लोगों के मुताबिक ट्रैक्टर-ट्राली वाला बहुत ही रफ्तार में था। इस वजह से घटना घटित हुई।
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किशोर की चली गई थी जान
बीते वर्ष दिसंबर माह में मोहाना थाना क्षेत्र में मिट्टी लेकर आ रही ट्रैक्टर-ट्राली ने एक किशोर को चपेट में ले लिया था। इस हादसे में उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। लोगों के मुताबिक ट्रैक्टर वाला बहुत तेज गति में था। इसलिए जबतक किशोर संभलता उसे चपेट में ले चुका था।
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खेत में खुदाई से खत्म हो जाती है मिट्टी की उर्वरा शक्ति
कृषि विभाग के जानकारों के मुताबिक अक्सर किसान खेत की मिट्टी बेच देते हैं। ऐसा करने से उन्हें कुछ रुपये जरूर मिल जाते हैं। लेकिन, इससे खेत की उर्वरा शक्ति खत्म हो जाती है। उपजाऊ मिट्टी खेत से निकल जाने के बाद पैदावार पर असर पड़ता है। क्योंकि मिट्टी बहुत कमजोर रहती है। उसमें पहले जैसी मिट्ठी इतना शक्ति नहीं रहता है।
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यहां हुई कार्रवाई
उसका बाजार थाने की पुलिस ने क्षेत्र के उटिया ग्रामपंचायत के पल्हया गांव में छह जून की देर रात अवैध रूप से मिट्टी खनन कर रहे एक लोडर, दो ट्रैक्टर व एक मिट्टी लदी ट्रॉली सीज कर दी। थानाध्यक्ष दिनेश कुमार सरोज ने बताया कि मंगलवार की रात करीब 10 बजे सूचना मिली की पल्हया गांव में मिट्टी का खनन किया जा रहा है, खनन करने वालों के पास परमिट नहीं है। वह मौके पर पहुंचे तो वहां अवैध खनन चल रहा था। उन्होंने मौजूद सभी गाड़ियों को थाने लाकर सीज कर दिया।
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जेसीबी समेत तीन ट्रैक्टर ट्राली को किया गया सीज
उसका बाजार थाना क्षेत्र के छितरापार गांव में चार जून की देर रात में अवैध मिट्टी खनन किया जा रहा था। पुलिस को रात्रि भ्रमण के दौरान अवैध मिट्टी खनन की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पहुंची। पुलिस को दूर ही देखकर खनन में लिप्त ड्राइवर व अन्य गाड़ी छोड़ फरार हो गए। थानाध्यक्ष दिनेश कुमार सरोज ने बताया कि पुलिस की गाड़ी पहुंचते ही खनन कर रहे लोग मिट्टी से भरा ट्रैक्टर-ट्राली वहीं पर छोड़ कर फरार हो गए। प्राइवेट ड्राइवर को बुलवाकर जेसीबी और ट्रैक्टर ट्रॉली को थाने पर लाया गया। गाड़ी नंबर के आधार पर एक जेसीबी और तीन ट्रैक्टर ट्राली को सीज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।
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500 से 700 रुपये ट्राली बिक रही मिट्टी
जानकारी के मुताबिक अलग-अलग क्षेत्रों में मिट्टी का अलग-अलग रेट है। 500 से 700 रुपये ट्राली की दर से सौदा हो रहा है। इसमें डुमरियागंज और इटवा तहसील क्षेत्र में छह से सात सौ रुपये ट्राली है। जबकि बांसी क्षेत्र में अधिकतम पांच सौ रुपये ट्राली है। वहीं नौगढ़ और शोहरतगढ़ में छह सौ रुपये रेट चल रहा है। जैसा जिस ग्राहक से पट जाए सौदा पक्का हो जाता है।
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गांव-गांव में पाल रखे हैं मुखबिर
सूत्रों के अनुसार खनन माफिया जहां लंबे समय यानी एक से दो माह तक काम चलता है, उस गांव व क्षेत्र में मुखबिर पाल लेते हैं। सूचना देने के एवज में उन्हें रुपये देते हैं। उनका काम यह होता है कि गांव के बाहर रहेंगे। देखेंगे की पुलिस और राजस्व विभाग का तो कोई व्यक्ति नहीं आ रहा है। अगर कोई आता तो पहले ही सूचना दे देते हैं। यह लोग खनन स्थल से लगभग एक से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर रहते हैं। जिससे सूचना मिलने के बाद खनन में लिप्त लोग मौके से भाग सकें।
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