संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सेवानिवृत्त कर्मचारी एवं पेंशनर्स एसोसिएशन और शिक्षक महासंघ जिला इकाई ने मंगलवार को पांच सूत्री मांगों के समाधान को लिए कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री के नाम संबोधित मांगों के समाधान का ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा।
महासंघ जिलाध्यक्ष अवधेश यादव ने कहा कि इसी वर्ष के प्रारंभ में आठवें वेतन आयोग की घोषणा से देश के कर्मचारियों, शिक्षकों एवं पेंशनरों में एक संदेश गया कि सरकार अपने कर्मचारियों, शिक्षकों एवं पेंशनरों के वेतन एवं पेंशन का पुनरीक्षण एक जनवरी 2026 से करना चाहती है, जिससे एक खुशी का वातावरण उत्पन्न हुआ।
जैसे-जैसे समय बीतता गया वैसे वैसे निराशा भी होने लगी, क्योंकि अभी तक आठवें वेतन आयोग के गठन की कार्रवाई नहीं की गई है। इसे लेकर कर्मचारियों, शिक्षकों एवं पेंशनरों में निराशा का भाव उत्पन्न हो ही रहा था कि इसी मध्य फाइनेंशियल बिल 2025 एक कानून के रूप में सामने आ गया।
इस बिल में पूर्व पेंशनरी नियमों में बदलाव करके पेंशनरों के समूह में भेद पैदा करने का प्रयास किया गया। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि 31 दिसंबर 2025 तक सेवानिवृत्त पेंशनरों की पेंशन का पुनरीक्षण नहीं किया जाएगा। इस तरह पेंशनरों की पेंशन का पुनरीक्षण, कर्मचारियों के वेतन पुनरीक्षण से डी-लिंक हो जायेगा।
जुलाई 2024 से महंगाई भत्ते का आदेश कर्मचारियों के लिए हुआ, पेंशनरों के लिए महंगाई राहत का आदेश लगभग 10 दिन के बाद देश के पेंशनरों में असंतोष का वातावरण उत्पन्न होने पर शासनादेश जारी किया गया। वर्तमान में एक जनवरी, 2025 से मिलने वाले दो प्रतिशत महंगाई भत्ते की किश्त का शासनादेश भारत सरकार द्वारा अपने पेंशनरों के लिए 11-04-25 को लगभग एक सप्ताह बाद जारी किया गया है।