फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: देर रात तक जागने से बढ़ रहे तनाव और अवसाद के मरीज

Fri, 30 Aug 2024 01:38 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
करवटें बदलते गुजरती हैं रात तो दिन को करें व्यवस्थित
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। दिनभर की भागदौड़ और परिश्रम के बाद भी काफी लोग देर रात तक जग रहे हैं, जिससे लोगों में तनाव और अवसाद की स्थिति बन रही है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में वर्तमान समय में इस तरह के पांच से 10 मरीज आ रहे हैं, जो दिनभर कार्य करने के बाद भी देर रात तक जग रहे हैं। उनकी रात करवटें बदलते गुजरती हैं। दिनभर की घटनाएं दिमाग में चलचित्र की तरह चलती हैं। नींद नहीं आने पर देर रात तक मोबाइल पर रील देख रहे हैं।
मनोचिकित्सक डॉ. अफजल ने बताया कि अनिद्रा की परेशानी सभी उम्र के लोगों में देखने को मिल रही है। इनमें सबसे ज्यादा युवा हैं। काम का तनाव, यातायात में लगने वाले अधिक समय और मोबाइल, कंप्यूटर या लैपटॉप पर अधिक समय बिताने से समस्या बढ़ रही है। काम में समय-सीमा की मांग ने भी युवा पेशेवरों के बीच काम और नींद के बीच असंतुलन पैदा किया है। उन्होंने कहा कि अपर्याप्त नींद का स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जिससे मूड में बदलाव, चिड़चिड़ापन और चिंता होती है। लगातार नींद की कमी से स्मृति और निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, मोटापा, मधुमेह और हृदय संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं। अनिद्रा के शिकार ज्यादातर लोग तनाव, अवसाद, सिजोफ्रेनिया, मीनिया आदि बीमारियों से ग्रसित हैं।
विज्ञापन


अनिद्रा के कारण
-अवसाद, मीनिया, सिजोफ्रेनिया व नशे की लत
-देर रात तक जागना, सुबह देर से उठना
-दिन में सोना और रात को नींद आने की उम्मीद करना
-
ये करें उपाय
-काम और आराम के घंटे व्यवस्थित करें।

-स्क्रीन टाइम को कम से कम एक घंटा कम करें।

-सोते समय मोबाइल को पास नहीं रखें।

-रात का भोजन हल्का लें और खाने के बाद टहलें।

-
केस नंबर एक
बढ़नी क्षेत्र के एक युवा को देर रात तक जाग कर मोबाइल पर रील देखने की आदत हो गई थी। जिससे वह दिन में भी समस्या होने लगी। आखिर में वह अनिंद्रा का शिकार हो गया। उसे डॉक्टर को दिखाना पड़ा, जिससे उसे मोबाइल की लत का छुड़ाने के लिए छह माह तक दवा करवाना पड़ा था।
विज्ञापन


केस नंबर दो
पथरा क्षेत्र का एक व्यक्ति प्राइवेट नौकरी करता था। काम के ओवरलोड के कारण वह रात में भी नहीं सो पा रहा था। जिससे धीरे-धीरे वह तनाव में चला गया। घर के लोगों ने डॉक्टर को दिखाया ताे काम के प्रति सोचने के लिए मना किया गया। रात में सोने के लिए महीनों दवा भी चला।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें