महिला प्रत्याशियों की भागीदारी दस फीसदी से भी कम
सिद्धार्थनगर। जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी मैदान में उतरे कुल 56 प्रत्याशियों में इस बार महिला उम्मीदवारों की भागीदारी दस फीसदी से भी कम है। केवल पांच महिलाएं ही चुनावी मैदान में हैं। कांग्रेस ने दो और सपा ने एक महिला को टिकट दिया है। वहीं, अन्य किसी प्रमुख दल ने महिलाओं को प्रत्याशी नहीं बनाया है।
जिले के राजनीतिक इतिहास में महिलाओं की भागीदारी कम ही रही है। इस बार के चुनाव में ही पुरानी तस्वीर देखने को मिल रही है। कपिलवस्तु विधानसभा में कुल 10 उम्मीदवार चुनाव में हैं, जिनमें एक भी महिला का नाम शामिल नहीं है। यही हाल शोहरतगढ़ का भी है, जहां 12 प्रत्याशी चुनावी ताल ठोक रहे हैं। इस क्षेत्र में महिला प्रत्याशी नहीं हैं। इटवा विधानसभा क्षेत्र में कुल नौ प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, पर एक भी महिला का नाम इस सूची में शामिल नहीं है।
बांसी और डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र में इस मामले में जरूर अपवाद साबित हो रहे हैं। बांसी से कुल 12 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं, जिनमें तीन महिलाएं शामिल हैं। कांग्रेस ने महिला उम्मीदवार किरन शुक्ला को टिकट दिया है। इसके अलावा अभय समाज पार्टी से रूनमती और सबका दल यूनाइटेड से शकुंतला के रूप में दो अन्य महिलाओं ने इस बार के चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र से 13 उम्मीदवार मैदान में हैं। उनमें से दो महिला प्रत्याशी हैं। सपा ने सैय्यदा खातून को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस के टिकट से कांती पांडेय चुनाव लड़ रही हैं।
महिलाओं को नहीं मिली राजनीतिक हिस्सेदारी
सिद्धार्थनगर। आधी आबादी को राजनीतिक भागीदारी देने के शोर के बीच राजनीतिक दलों के चुनाव जीतने की गणित, इस बार के चुनाव में भी भारी पड़ रही है। जिले का राजनीतिक इतिहास भी इसकी गवाही दे रहा है। आजादी के बाद से वर्ष 2017 तक के चुनावों में जिले से केवल तीन महिलाएं ही विधानसभा तक पहुंच पाईं। इस कड़ी में सबसे आगे शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र रहा, जहां से वर्ष 1980, 1985 और 1989 में लगातार तीन बार कांग्रेस के टिकट से चुनाव जीतकर कमला साहनी विधायक बनीं। इसी सीट से वर्ष 2012 में सपा के टिकट से चुनाव लड़कर लालमुन्नी सिंह ने जीत दर्ज की थी। इसके अलावा डुमरियागंज में तत्कालीन विधायक तौफीक अहमद के निधन के बाद वर्ष 2010 में हुए उपचुनाव उनकी पत्नी खातून तौफीक बसपा के टिकट से चुनाव जीतकर विधानसभा तक पहुंची थीं। बांसी, कपिलवस्तु और इटवा से अब तक कोई महिला उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सकी।