संवाद न्यूज एजेंसी
भागलपुर। कस्बे में चल रहे राम कथा के सातवें दिन कथा वाचिका ने लक्ष्मण परशुराम संवाद, विदाई की कथा का वर्णन किया। जिसे सुन श्राेता भावविभाेर हो गए। लोगों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए।
अयोध्या धाम से आईं कथा वाचिका पं. गौरांगी गौरी ने कहा कि धनुष टूटने की आवाज सुन तपस्या कर रहे परशुराम जी की आंखे खुल गईं। वह सीधे जनकपुर पहुंचे और मिथिला नरेश से कहा कि जिस किसी ने भी शिव धनुष तोड़ी है उसे स्वयंवर से निकाल कर मेरे सामने प्रस्तुत करो नहीं तो सभी राजाओं को मार डालेंगे। परशुराम के क्रोध को शांत करने का भगवान राम ने प्रयास किया, लेकिन वह शांत नहीं हुए। इस बीच परशुराम और लक्ष्मण का सीधा संवाद होता है।
कथा को आगे बढ़ाते हुए पं. गौरांगी ने कहा कि भगवान श्रीराम ने स्वयं के नारायण होने का प्रमाण पत्र दिया, तब जाकर उनका क्रोध शांत हुआ। इस दौरान भल्लर मिश्रा, नित्यानंद मिश्रा, सुनील पांडेय, अमरेंद्र सिंह मिंटू, डॉ. श्याम, रोहित सिंह, अभय मिश्रा, सतीश जायसवाल आदि मौजूद रहे।