- बिस्कोहर, डेगहर और परसोहन सिवान गांव में खेतों में पड़ी दरारें
- निजी नलकूप और पंपिंग सेट से सिंचाई करने पर बढ़ रही खेती की लागत
बिस्कोहर। अगस्त का दूसरा सप्ताह समाप्त होने को है लेकिन क्षेत्र में अब तक अच्छी बारिश नहीं होने से धान की फसल संकट में है। इटवा तहसील क्षेत्र के बिस्कोहर, डेगहर और परसोहन सिवान में बारिश न होने से खेतों की मिट्टी सूखकर फटने लगी है। कई खेतों में धान के पौधे पीले पड़ गए हैं और अब इनके सूखने का खतरा बढ़ गया है। बृहस्पतिवार को दोपहर मौसम बदला और कुछ देर रिमझिम फुहारें पड़ीं लेकिन यह बारिश सूखती फसल को राहत देने के लिए नाकाफी साबित हुई।
किसान भारत प्रसाद मिश्रा, गोमती साहू, सालिक राम, हरिश्चंद्र साहू, छागुर राइनी और किशन पासवान ने बताया कि धान की खेती शुरू करने से लेकर रोपाई तक उन्हें कई बार निजी संसाधनों का सहारा लेना पड़ा। पहले निजी साधनों से पानी चलाकर बीज की बोआई की गई और इसके बाद किसी तरह रोपाई पूरी की गई।
किसानों का कहना है कि जून से अगस्त तक बीच-बीच में हुई हल्की बारिश से कुछ समय के लिए खेतों में नमी जरूर आई लेकिन फसल की जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल सका। अब खेतों की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। जिन खेतों में पानी की व्यवस्था नहीं है वहां पौधों के पीले पड़ने और सूखने का खतरा अधिक है।
सिंचाई पर बढ़ रहा खर्च
- बारिश नहीं होने के कारण किसानों को धान की फसल बचाने के लिए निजी नलकूप और पंपिंग सेट से सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे डीजल, बिजली और पानी की लागत बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि बारिश के भरोसे की जाने वाली खेती पर अब अतिरिक्त खर्च लग रहा है। यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन प्रभावित होने के साथ किसानों की लागत भी निकलना मुश्किल हो सकता है।
हल्की फुहार से नहीं मिली राहत
बृहस्पतिवार दोपहर बाद कुछ देर हुई रिमझिम बारिश से मौसम तो बदला लेकिन खेतों में पर्याप्त पानी नहीं मिल सका। किसानों का कहना है कि सूखी जमीन और धान की फसल को इस समय झमाझम बारिश की जरूरत है। केवल फुहारों से खेतों में नमी बनाए रखना संभव नहीं है। अब किसानों की निगाहें आने वाले दिनों में होने वाली बारिश पर टिकी हैं।