जिले में धान की खेती पर कोरोना संकट
अप्रैल से शुरू हो जाती थी धान के बीज की बिक्री, अभी तक नहीं आया बीज
मई के आखिरी सप्ताह से जिले में नर्सरी डालने का काम होता है शुरू
हैदराबाद के बीज से तराई क्षेत्र में लहलहाती है धान की फसल
दो लाख हेक्टेयर भूमि पर होती है धान की खेती
श्याम सुंदर तिवारी
सिद्धार्थनगर। भगवान भरोसे खेती करने वाला किसान हर बार प्रकृति की मार का शिकार होता है। कभी सूखा तो कभी ओलावृष्टि और कभी बाढ़ किसानों के अरमानों पर पानी फेर देता है। इस बार कोरोना धान की खेती करने वाले किसानों को रुलाने के लिए आ गया है। कारण अभी तक जिले में धान के बीज की आपूर्ति नहीं हो पाई है। ऐसे में मई के अंतिम सप्ताह में धान की नर्सरी डालने वाले किसानों तक धान का बीज कैसे पहुंचेगा। यह बड़ा संकट है।
नेपाल सीमा से सटे इस जनपद की गिनती तराई क्षेत्र में होती है। यहां की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। 70 प्रतिशत से अधिक आबादी खेती पर निर्भर है। यहां किसान मुख्य रूप से दो फसलें उगाते हैं। इसमें धान और गेहूं की फसल शामिल है।
हर बार किसान किसी न किसी आपदा का शिकार हो जाता है। नेपाल पानी छोड़ता है तो बाढ़ से फसल नष्ट हो जाती है। वहीं कम बारिश में सूखे की मार से फसल बर्बाद हो जाती है। गत वर्ष सूखा के कारण धान की फसल बर्बाद हो गई। कई बार हुई बारिश और तेज हवा से 40 प्रतिशत से अधिक रबी फसल प्रभावित हो गई। अब धान पर कोरोना का संकट मंडरा रहा है। कारण हर वर्ष धान के बीज की आपूर्ति मार्च के आखिरी सप्ताह और अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक हो जाती थी। मगर इस वर्ष अभी तक एक बार धान का बीज आया है। वह भी बहुत कम मात्रा में।
ऐसे में अगर जल्द बीज की आपूर्ति नहीं हुई तो किसानों के सामने संकट खड़ा होगा। उन्हें बीज नहीं मिलेगा तो धान की फसल प्रभावित हो सकती है। जिला कृषि अधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि बीज आना शुरू हो गया है। मांग की गई है। किसानों को बीज के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
हैदराबाद के बीज से लहलहाती है तराई की फसल
जिले में अधिकांश धान का बीज हैदराबाद से आता है। किसानों का मानना है कि वहां का सांभा समूरी का बीज इस मिट्टी पर अधिक पोस करता है। इसलिए नर्सरी भी अच्छी होती है और पैदावार भी अच्छी होती है। दूसरे नंबर पर आपूर्ति बंगाल से होती है। इसके अलावा प्रदेश अन्य हिस्सों से भी धान का बीज आता है।
दो लाख हेक्टेयर भूमि पर होती है धान की खेती
आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में करीब दो लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है। इसमें कुछ बर्डपुर, चिल्हिया और शोहरतगढ़ क्षेत्र में काला नमक धान भी लोग लगाते हैं। इसके अलावा कुछ हिस्से में मोटा धान लगाते हैं।
अभी एक हजार क्विंटल धान आया
पिछले वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो 27394 क्विंटल धान का बीज जिले में प्राइवेट और सरकारी समिति पर आया था। यह अप्रैल के पहले सप्ताह तक पहुंच चुका था। जरूरत के अनुसार आगे फिर मांग होती है। मगर कोरोना के चलते इस बार फर्म पर ही लेट पैकिंग हुई। इसलिए 19 और 20 अप्रैल तक मात्र एक हजार क्विंटल बीज आया है।