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Siddharthnagar News: 75 में 35 कर रहे कार्य... 40 को रिपेयरिंग का इंतजार

Sat, 20 Jul 2024 02:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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कोरोना काल में मरीजों की सुविधा के लिए 75 मेडिकल कॉलेज और दो सीएचसी के लिए आए थे छह वेंटिलेटर
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आईसीयू वार्ड के न होने के कारण मरीज होते हैं रेफर

नये भवन में वार्ड शुरू होने के बाद उपयोग में लाए जाने की है योजना

बच्चों के लिए एसएनसीयू और पीआईसीयू के अलावा अधिक उम्र के मरीजों के लिए नहीं है आईसीयू की सुविधा

संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। कोरोना काल में मरीजों का जीवन बचाने के लिए लगाए गए सहायक उपकरण वेंटिलेटर मशीन खुद बीमार हो चुकी हैं। वह इसलिए कि आने के बाद उन्हें उपयोग में लिया ही नहीं गया। जबकि, आईसीयू की सुविधा न होने के कारण मरीज हर दिन रेफर हो रहे हैं। मशीनों के बारे में जब जानकारी ली गई तो पता चला कि एमसीएच विंग और ऑक्सीजन प्लांट के पास बने वार्ड में कुछ मशीनें कमरे में बंद हैं। वहीं जिम्मेदारों की रिपोर्ट के अनुसार, माधव प्रसाद त्रिपाठी कॉलेज के लिए 75 वेंटिलेटर मशीनें आई थीं। मौजूदा समय में 35 मशीन को उपयोग में लाया जा रहा है। 40 को क्रियाशील होने से पहले रिपेयरिंग से गुजरना पड़ेगा। रिपेयरिंग कराने और जल्द प्रयोग में लाने की जिम्मेदार दलील दे रहे हैं।

कोरोना संक्रमण काल शुरू होने के बाद दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोगों ने जान गवां दिया। अस्पताल में पर्याप्त संसाधन न होना भी कहीं न कहीं मौत की बड़ी वजह बनी। इसमें ऑक्सीजन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भाषा में जीवन देने के लिए सहायक उपकरण वेंटिलेटर मशीन का न होने प्रमुख कारण था। फिर कोरोना जैसी आफत आने पर उससे निपटा जा सके। लोगों की जान को बचाया जा सके। इसके लिए सरकार की ओर हर अस्पताल में पीएम केयर फंड के जरिए वेंटिलेटर मशीन उपलब्ध कराने के साथ-साथ वार्ड आरक्षित करके उसके संचालन का निर्देश दिया था।
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आंकड़ों के मुताबिक माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज जो पहले जिला अस्पताल था, वहां के लिए 75 वेंटिलेटर मशीनें कई शिफ्ट में आईं। इसमें जिला और महिला अस्पताल परिसर में बने ऑक्सीजन प्लांट के पास वेंटिलेटर युक्त वार्ड बनाया गया था। कोरोना संक्रमण काल के बीच तीसरी और चौथी लहर तक आई। जब संक्रमण बढ़ा तो मॉकड्रिल करके मशीनों की स्थिति और उसके चलने के बारे में जानकारी लेकर कमरे में बंद कर दिया जाता था। मशीनों की हकीकत जानने के लिए एमसीएच विंग में पहुंचे, यहां दो वार्ड में 20 से अधिक मशीनें बेड के साथ पड़ी हुई हैं। साफ-सफाई तो दिखा, लेकिन चालू के बारे में जानकारी नहीं मिली। इसके बाद पहुंचे ऑक्सीजन तो यहां भी वार्ड में मशीनें रखी मिलीं।
इसके बारे में जिम्मेदारों से बात की गई तो पता चला कि पीआईसीयू और एसएनसीयू वार्ड सहित अन्य में 35 मशीनों का प्रयोग किया जा रहा है। जबकि, 40 मशीनों को प्रयोग में लाने की प्रक्रिया चल रही है। उन्हें रिपेयरिंग की जरूरत है।

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सीएचसी पर क्रियाशील मिली मशीन

कोरोना काल में ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेंवा में तीन वेंटिलेटर का वार्ड बनाया गया था। यहां जानकारी ली गई तो पता चला कि जरूरतमंद मरीजों को भर्ती करके इलाज करने में प्रयोग किया जा रहा है।

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प्रयोग में नहीं आई मशीन और वार्ड

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिठवल तिलौली में तीन कोविड वेंटिलेटर, पांच मॉनिटर एवं पांच बेड लगे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी राम निवास ने बताया कि उनकी जॉइनिंग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिठवल में एक नवंबर को हुई थी। जब से हम यहां हैं तब से इसका उपयोग नहीं हुआ है। क्योंकि इस तरह के मरीज अभी तक नहीं आए। इसलिए इस मशीन का उपयोग नहीं हो सका। वेंटिलेटर मशीन जिस कमरे में लगी है। उस जगह साफ-सफाई दिखाई दे रही है। वेंटिलेटर मशीन वाले कमरे के सामने ऑक्सीजन का बाटला भी मौजूद है।

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आईसीयू वार्ड न होने के कारण रेफर हो रहे मरीज

माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से ऐसे मरीज भी रेफर किए जाते हैं, जिनका इलाज संभव है। यहां के डॉक्टर उसे कर सकते हैं, लेकिन आईसीयू की सुविधा न होने के कारण इलाज करने में सक्षम होते हुए भी रेफर कर रहे हैं। अगर इसी वेंटिलेटर का उपयोग किया जाता है तो शायद हर 24 घंटे में हादसे के शिकार, हार्ट अटैक सहित अन्य प्रकार के सात आठ गंभीर मरीजों को रेफर होना पड़ा है। इससे जहां उन्हें लाने और लेकर जाने में जान खतरा बना रहता है। वहीं, आर्थिक क्षति और समय की बर्बादी भी होती है।
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मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर मशीन की देखरेख होती है। लगभग 35 मशीन उपयोग में लाई जा रही हैं। अन्य को क्रियाशील किया जाएगा। उन्हें मामूली मरम्मत की जरूरत है, जिससे कराकर जल्द ही प्रयोग किया जााएगा।

-डॉ. राजेश मोहन, प्राचार्य, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
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