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एक लाख आबादी को नए वर्ष पर मिलेगी शुद्ध पेयजल की सौगात

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एक लाख आबादी को नए वर्ष में मिलेगी शुद्ध पेयजल की सौगात
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नीर निर्मल योजना के तहत पाइप लाइन से घर-घर पहुंचेगा पानी
37 पेयजल परियोजनाओं का काम अंतिम चरण में, पांच स्थानों जलापूर्ति शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नए वर्ष पर जिले की एक लाख आबादी को शुद्ध पेयजल की सौगात मिलेगी। नीर निर्मल योजना के तहत ग्राम पंचायतों में पाइप लाइन के तहत घर-घर पानी पहुंचाए जाने पर काम किया जा रहा है। 37 स्थानों पर ओवरहेड वाटर टैंक की स्थापना और पाइप लाइन बिछाए जाने की प्रक्रिया अंमित चरण में है। जिम्मेदारों का मानना है कि नए साल में सभी स्थानों में जलापूर्ति शुरू हो जाएगी।
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित इस जनपद में हर वर्ष जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई), एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) सहित जल संबंधित बीमारियों का लोग शिकार होते हैं। जांच में पानी के दूषित होने की बात सामने आ चुकी है। बीमारियों से बचाव के लिए सरकार शुद्ध पेयजल मुहैया कराने पर जोर दे रही है। साथ ही चिकित्सक हैंडपंप से उगलते हुए दूषित पानी के बचाव के लिए शुद्ध पेयजल का सेवन करने की सलाह दे रहे हैं जिससे लोगों को शुद्ध पेयजल मिले और वह जल से जुड़ी बीमारी से बच सकें। इसके मद्देनजर नीर निर्मल परियोजना के तहत जिले की 42 ग्राम पंचायतों को चिह्नित कर वहां शुद्ध पेयजल मुहैया कराने पर रणनीति बनी है। इसके बाद ग्राम पंचायतों का सर्वे किया गया और सभी 42 गांवों को उपयुक्त माना गया। इसमें ग्राम पंचायत के टोले, परिवार और सदस्यों की संख्या तैयार की गई। वर्ष 2019-20 ओवरहेड वाटर टैंक बनाने का काम शुरू हुआ। विभागीय जिम्मेदारों के मुताबिक पांच स्थानों पर काम पूरा करके जलापूर्ति शुरू हो गई। शेष 37 स्थानों पर काम आखिरी चरण में है। नए वर्ष पर घर-घर शुद्ध जल मिलने लगा। इसमें लगभग एक लाख आबादी का लाभ मिलेगा। अधिशासी अभियंता, जल निगम पवन कुमार यादव ने बताया कि नीर निर्मल योजना के तहत पाइप लाइन पेयजल आपूर्ति के लिए काम चल रहा है। नए वर्ष पर 37 स्थानों पर जलापूर्ति शुरू होने की उम्मीद है क्योंकि काम आखिरी चरण में चल रहा है।
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पानी के लिए देना होगा शुल्क
शासन की ओर से शुरू की गई पाइप लाइन पेयजल योजना में गांव के सभी परिवारों को कनेक्शन दिया गया है। इसमें उन्हें शासन की ओर से निर्धारित शुल्क लिया गया। इसके बाद प्रति माह की दर से उन्हें पानी के बिल का भुगतान करना होगा। तभी उन्हें पानी मिलेगा।
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मिलेगा शुद्ध पेयजल, कम होगी बीमारी की दर
जानकारों का मानना है कि अगर शुद्ध पानी मिलेगा तो पेट संबंधित बीमारी काफी कम होगी। कारण इस वाटर हैडटैंक का पानी 250 से 400 फीट नीचे से मिलेगी। जबकि सामान्य रूप से गांवों में अब भी 20 से 50 फीट नीचे का पानी लोग पीते हैं। ऐसे में वह बीमारियों की गिरफ्त में आते हैं।
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