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चौथाई फसलें चौपट

Sat, 03 Sep 2016 11:40 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला/ सिद्धार्थनगर
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फसल - फोटो : अमर उजाला
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मौसम ने फिर किसानों को करारी चोट दी है। बाढ़ और सूखा ने जिले की 25 फीसदी फसल को चौपट कर दिया है। यह प्रारंभिक आकलन है। सूखे से हुए नुकसान में अभी और इजाफा हो सकता है। लगातार तीसरे साल फसल के इस नुकसान ने किसानों की कमर तोड़ दी है। कर्ज लेकर खेती करने वाले किसान छाती पीट रहे हैं तो बड़े काश्तकारों की जेबें भी तंग हो गई हैं। कृषि विशेषज्ञों का भी दावा है कि अगर एक सप्ताह में बारिश नहीं हुई तो स्थिति और भयावह होगी। 
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जिले के 1.91 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में इस वर्ष खरीफ की खेती हुई है। इसमें 1.87 लाख हेक्टेयर रकबा सिर्फ धान का है। मौसम वैज्ञानिकों की घोषणा थी कि इस वर्ष पर्याप्त बारिश होगी। किसान यह सोच आह्लादित थे कि खूब बारिश होगी तो धान की पैदावार भी ज्यादा होगी। इन्हीं उम्मीदों के साथ कर्ज लेकर धान की रोपाई की। उम्मीदों पर ग्रहण तब लगा, जब नेपाल में हुई बारिश से जिले के बांध टूटने लगे। जलप्लावन से खेत-खलिहान डूब गए। कई गांव डूब गए।

जुलाई माह के अंतिम सप्ताह से अगस्त के प्रथम सप्ताह तक बाढ़ की यह स्थिति बनी रही। बाढ़ का पानी उतरा तो आधे जिले के धान की फसल बर्बाद हो चुकी थी। जो क्षेत्र बाढ़ से बचे थे वहां के किसानों की उम्मीदों को अल्पवृष्टि ने रौंद दिया। अगस्त में नाममात्र की वर्षा से धान की फसल सूख गई है। कहीं पौधे पीले हो चुके हैं तो कहीं पूरा खेत साफ हो चुका है। खून-पसीना एक कर खेती करने वाले किसान इस तबाही से जार-जार रोने को मजबूर हैं।
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