सिद्धार्थनगर। यूनिवर्सिटी प्रशासन की बार-बार हिदायतों के बावजूद परीक्षा फार्म भरने को लेकर महाविद्यालयों का रवैया उदासीन बना हुआ है। समय से फार्म भरने में दिनचस्पी न दिखाए जाने से छात्र-छात्राओं के भविष्य के सामने चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। अंतिम तिथि में दो दिन शेष होने के बावजूद अब तक 1.55 लाख रजिस्ट्रेशन के सापेक्ष करीब 65 हजार अभ्यर्थियों का ही परीक्षा शुल्क जमा हुआ है। ऐसे में फीस जमा न करने वाले हजारों अभ्यर्थियों के परीक्षा से वंचित होने की आशंका बढ़ती जा रही है।
सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी की वार्षिक परीक्षाएं मार्च के दूसरे पखवाड़े से प्रस्तावित हैं। इसके लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन युद्धस्तर पर तैयारियों में जुटा हुआ है। परीक्षा में शामिल होने के लिए 7 फरवरी से ही परीक्षा फार्म भरने की प्रक्रिया शुरू है। इसकी अंतिम तिथि 25 फरवरी तय थी। अभ्यर्थियों की सुस्ती के चलते बाद में इसे बढ़ाकर 6 मार्च कर दी गई है। अंतिम तिथि बीतने में महज दो दिन शेष हैं, बावजूद महाविद्यालयों की लापरवाही से फार्म भरने की प्रक्रिया गति नहीं पकड़ पा रही। अब तक 1.55 लाख अभ्यर्थियों का यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर पंजीकरण हुआ है। इसके सापेक्ष फीस महज 65 हजार अभ्यर्थियों ने ही जमा किया है। परीक्षा फार्म भरने की सुस्ती तब है, जबकि यूनिवर्सिटी ने इस पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है। बिना कहीं लाइन लगाए अभ्यर्थी एक स्थान पर बैठे-बिठाए 10-15 मिनट में आसानी से फार्म भर सकते हैं।
इसके बावजूद सुस्ती मुश्किलें खड़ी करती जा रही है। हर हाल में समय से परीक्षा कराने को लेकर तत्पर यूनिवर्सिटी प्रशासन का साफ कहना है कि अंतिम तिथि अब आगे नहीं बढ़ेगी। अगर अभ्यर्थी 6 मार्च तक रजिस्ट्रेशन कराकर फीस जमा नहीं करते तो उनका आवेदन रद्द मानते हुए परीक्षा से वंचित कर दिया जाएगा। यूनिवर्सिटी के उप कुलसचिव महेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि समय से फार्म न भरने वाले अभ्यर्थियों को एडमिट कार्ड ही जारी नहीं होंगे। परीक्षा से वंचित होने के लिए वह स्वयं जिम्मेदार होंगे।