सिद्धार्थनगर। शहर में स्वच्छता की क्षेत्र में बेहतर कार्य दिखाते हुए राष्ट्रीय पर हुई रैंकिंग में बड़ा बदलाव हुआ है, जबकि मौके पर हकीकत कुछ और ही दिख रहा है। मात्र एक वर्ष में स्वच्छता रैंकिंग में 1241 स्थान ऊपर पहुंचने वाले शहर की सड़क पर पसरे गंदे पानी व कूड़े के बीच लोगों का गुजरना मजबूरी बन गया है। कुछ जगहों पर क्षतिग्रस्त व चोक नालियों के कारण दिक्कत है तो कुछ सड़कों के किनारे नाली नहीं बनने से लोग सांसत झेल रहे है।
स्वच्छता में राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2022 में हुई रैंकिंग में 1839.78 स्कोर के साथ शहर (नगर पालिका सिद्धार्थनगर) 3055 वें स्थान पर था। जबकि वर्ष 2023 में हुई रैंकिंग में 3606.36 स्कोर के साथ स्वच्छता में 1814 वें स्थान पर पहुंच गया। कागजों में स्वच्छता में सुधार की जमीनी हकीकत की कुछ अलग ही तस्वीर दिख रही है। पहले नजर दौड़ाते है शहर के शास्त्रीनगर मोहल्ले की पीडब्लूडी के बगल से गुजरने वाली सड़क पर, जिस पर बने गड्ढों में बिन बारिश के ही जलभराव रहता है। इस सड़क किनारे बनी पुरानी नाली क्षतिग्रस्त होने के साथ ही चोक हो गई है। प्रतिदिन इस रास्ते गुजरने वाले मुहल्ले के रोहित सिंह कहते है कि पिछले कई वर्ष से न तो सड़क की मरम्मत हुई और न ही नाली का पुर्ननिर्माण हुआ। प्रतिदिन सड़क के गड्ढों में भरे गंदे पानी के बीच से गुजरना पड़ता है। अब नवीन मंडी से रेलवे स्टेशन व सिंहेश्वरी मंदिर जाने वाली टूटी सड़क से गुजरने वालों का हाल जाने। गोबरहवा बाजार के पास मोड़ पर इस सड़क के गड्ढे में गंदे पानी से प्रतिदिन गुजरने वाले बुद्धनगर निवासी अकबर का कहना है कि अगर वह बाइक से न गुजरे तो हर दिन गंदे पानी व कीचड़ से कपड़े खराब होंगे। उनका कहना है कि सड़क किनारे नाली नहीं बनने से लोगों के घर का गंदा पानी सड़क पर ही बहता है।
प्रदेश की रैंकिंग में 248 वें स्थान पर है शहर
प्रदेश स्तर हुई स्वच्छता रैंकिंग में नगर पालिका सिद्धार्थनगर 248 वें स्थान पर है। नगर पंचायत शोहरतगढ़ 85 वें रैंक के साथ जिले में नंबर एक पर है। जबकि बढ़नी बाजार 127 व नगर पालिका बांसी 184 वें स्थान पर है। स्वच्छता में नगर पंचायत डुमरियागंज प्रदेश में 344 वें स्थान है, जबकि जिले में सबसे खराब स्थिति में नगर पंचायत उसका बाजार को 373 वां रैंक मिला है।
इन मानकों के सर्वे के बाद होती है रैंकिंग
स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत नगर निकायों में व्यक्तिगत व सार्वजनिक शौचालय, घर-घर कूड़ा एकत्रिकरण, ओडीएफ, एमआईएस फीडिंग, कूड़ामुक्त अभियान की स्थिति देखी जाती है। इसके साथ ही स्वच्छता के प्रति नगर निकाय की तरफ हुए कार्यों के बारे में लोगों की राय ली जाती है। जिसके बाद इसका स्कोर तैयार होता है, जिस पर संबंधित नगर निकाय की रैंकिंग निर्धारित की जाती है।
कूड़े के ढेर का नहीं हो रहा निस्तारण
शहर के सरोजनीनगर व मुड़िला तक जाने वाले सड़क पर पसरे गंदे पानी व मार्ग किनारे कूड़े के ढेर के बदबू से राहगीर नाक बंदकर गुजरने को मजबूर रहते है। इस मार्ग स्थित स्कूल तक आने वाले छात्र-छात्राएं प्रतिदिन सांसत झेलते है। इस सड़क से गुजरने से पहले ही पैदल और बाइक सवार नाक कपड़े अथवा हाथ से बंद कर लेते है। स्थानीय निवासी कई बार कूड़ा हटाने के लिए गुहार लगा चुके है।
-
दुर्गंध से घर पर रहना मुश्किल
शहर के आजादनगर मोहल्ले के लोगों को गंदगी और बदबू से निजात मिलता नहीं दिख रहा है। मोहल्ले के आखिरी छोर पर पोखरे के पास बने मकानों में लोगों का रहना मुश्किल होता है। पोखरे में आसपास के घर का गंदा पानी गिरता है, जिसकी निकासी का इतजाम नहीं है। इससे फैलने वाले बदबू से यहां बसे लोग परेशान रहते ही है, मोहल्ले के लोग भी इस सड़क पर आने से परहेज करते है।
घर के किनारे सड़क पर पसरे गंदे पानी और आसपास की गंदगी से बहुत दिक्कत होती है, पहले शहर की नाली दुरूस्त कर जलनिकासी इंतजाम होना चाहिए।
ठुमार बाल्मिकि, आजादनगर
सड़क किनारे बनी नाली टूटकर क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे लोगों के घर का पानी टूटी सड़क के गड्ढों में भरता है, इसी गंदे पानी के बीच प्रतिदिन गुजरना पड़ता है।
राकेश गुप्ता, शास्त्रीनगर
सड़क किनारे नाली नहीं बनने से टूटी सड़क के गड्ढे में हर समय जलभराव रहता है, प्रतिदिन सड़क पर पसरे इसी गंदे पानी से होकर आना और जाना मजबूरी है।
इजहार, सिंहेश्वरीपुरम
सड़क में बने गड्ढे में जलभराव की समस्या थी ही अब मोहल्ले में सड़क किनारे पड़े कूड़े के ढेर से भी बदबू आती है, जिस कारण नाक बंद कर रास्ता तय करते है।
इमरान, छात्र, सरोजनीनगर
-