संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जच्चा और बच्चा दोनों स्वास्थ्य रहें और निजी अस्पताल में जाकर आर्थिक शोषण का शिकार न होने पाएं।
इसके लिए सभी अधीक्षक को जिम्मेदारी दी गई कि हर गर्भवती का अस्पताल में प्रसव सुनिश्चित कराना होगा। अगर उनके क्षेत्र के किसी गर्भवती का घर पर प्रसव हुआ तो उसकी जवाबदेही उनकी होगी।
उन्हें उसकी मॉनिटरिंग करने के साथ-साथ समय- समय पर चेकिंग करनी होगी। साथ ही अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के लिए प्रेरित करना होगा, जिससे जच्चा और बच्चा की होने वाली मौत के मामले को रोका जा सके।
सरकार मातृ और शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए बच्चे के गर्भ में आने और जन्म के बाद तय उम्र तक टीकाकरण की व्यवस्था की है। इसी प्रकार से गर्भवती महिलाओं की नियमित टीकाकरण, ब्लड सहित अन्य प्रकार की जांच, अल्ट्रासाउंड की सुविधा और पोषक आहार निशुल्क प्रदान कर रही है। इसके बाद भी ब्लड की कमी, नियमित निगरानी के बाद भी घर और निजी अस्पताल में गलत इलाज के कारण दम तोड़ दे रही हैं।
कई बार घर पर जन्म देते समय मां और बच्चे दोनों की मौत हो जाती है। कोई माह ही बचता है, जब किसी गर्भवती या नवजात की मौत न होता हो। ऐसी की घटना न सामने आए और मां और बच्चा दोनों स्वास्थ्य रहें, इसके लिए हर गर्भवती की नियमित माॅनिटरिंग करनी होगी।
बच्चे के जन्म का समय नजदीक आने के बाद उनसे समय- समय पर बात करने और प्रसव पीड़ा होते ही अस्पताल लाने के लिए प्रेरित करेंगे। इसकी पूरी जवाबदेही संबंधित क्षेत्र के पीएचसी और सीएचसी अधीक्षक होगी, जिनके यहां प्रसव की व्यवस्था है।
उन्हें आशा के जरिए महिला के बारे में नियमित जानकारी लेनी होगी। अगर कोई प्रसव घर पर हुआ तो क्यों हुआ है। कारण क्या था। साथ ही अगर कुछ अहित होगी तो बड़ी जवाबदेही होगी।
उन्हें हर गर्भवती की रिपोर्ट देनी रहेगी। इसमें लापरवाही पर कार्रवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि अगर यह व्यवस्था लागू हो जाएगी तो लाभ मिलेगा।