सिद्धार्थनगर। कुत्ता, बंदर या चीभ से चाटकर पानी पीने वाला कोई जानवर काटे तो लापरवाही न बरतें। तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें और एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाएं। ऐसा न करना आपके और आपके अपनों के जीवन पर भारी पड़ सकता है। ऐसे कई मामले हुए हैं कि कुत्ते के काटने पर इंजेक्शन नहीं लगवाया और तीन महीने में व्यक्ति की जान चली गई। चिकित्सकों का कहना है कि कुत्ते के काटने पर 24 घंटे के अंदर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवा लेना चाहिए। देर से इंजेक्शन लगवाना भी खतरनाक होता है। बरसात के मौसम में कुत्ते अधिक आक्रामक हो जाते हैं। इन दिनों माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के एआरवी कक्ष में हर रोज कुत्ते और बिल्ली के काटने के 15-20 मरीज पहुंच रहे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, जिले में हर साल तकरीबन सात हजार लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो रहे हैं। वहीं, दूसरे नंबर पर बंदर हैं। वे भी हमला करके लोगों को घायल करने में नहीं चूक रहे हैं। आमतौर पर कुत्ते को लोग पालते हैं। बिल्लियां भी घरों में दिख जाती हैं, लेकिन मौसम में बदलाव के साथ ये पालतू जानवर भी आक्रामक हो जाते हैं। अधिक ठंड, अधिक गर्मी और भूखे होने की दशा में ये हमला कर देते हैं। इस समय कुछ ऐसा ही हो रहा है। मौसम के परिवर्तन के साथ ये जानवर खुद को ढाल नहीं पा रहे हैं और लोगों पर हमला कर दे रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के एआरवी कक्ष से मिली सूचना के मुताबिक, यहां प्रतिदिन ऐसे 15-20 मरीज पहुंच रहे हैं। पशु चिकित्सकों का कहना है कि गर्मी और भूख की वजह से कुत्ते अधिक हमलावर हो जाते हैं। इनसे सावधान रहने की जरूरत है। इसके बाद भी कुत्ता काट ले तो एंटी रैबीज इंजेक्शन जरूर लगवाएं। इंजेक्शन लगवाने में लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। कुत्ता अगर पागल है और एआरवी लगवाने में चूक हुई तो जान को खतरा और बढ़ जाता है।
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बोले विशेषज्ञ
अधिक गर्मी की वजह से कुत्तों के व्यवहार में बदलाव आया है। ऐसे मौसम में कुत्ते ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं, क्योंकि कुत्तों के दिमाग में थर्मो रेगुलेटरी सिस्टम नहीं होता है। यही कारण है कि अपनी गर्मी को शांत करने के लिए जीभ निकालकर हांफते हैं। इससे महज 10 से 15 प्रतिशत ही गर्मी निकल पाती है। गर्मी के चलते उनमें चिड़चिड़ापन आ जाता है। जरा भी आवाज सुनने पर आक्रामक होकर लोगों को काट लेते हैं। दूसरी बड़ी वजह यह है कि इनके रहने की जगह भी कम होती जा रही है। हर तरफ मकान बन गए हैं और जो जगह बच रही है, वहां गाड़ियों का कब्जा हो गया है। इसकी वजह से इन्हें डर है कि एक दिन इस स्थान से भी भगा दिए जाएंगे। एक और कारण है, पहले घरों के आसपास इन्हें खाने के लिए पर्याप्त मात्रा में जूठन मिल जाता था। सफाई को लेकर लोग जागरूक हुए तो अब खाने को नहीं मिल पा रहा है। खाली पेट होने के चलते भी कुत्ते हमला करते हैं।
- डॉ. एमपी सिंह, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, सिद्धार्थनगर
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जीभ से चाटकर पानी पीने वाला हर जानवर खतरनाक
कुत्ता, बंदर और बिल्ली के सिर पर रैबिज का बैक्टिरिया हमेशा मौजूद रहता है। जब ये पागल हो जाते हैं तो बैक्टिरिया जीभ पर उतर आता है। इससे ये और ज्यादा घातक हो जाते हैं। ऐसे में ये किसी व्यक्ति को काट लें और उसने एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगवाया तो उसकी मौत हो सकती है। रैबीज के बैक्टिरिया इतने तेज होते हैं कि नसों में फैलते हैं और भीषण दर्द के साथ गर्मी और बेचैनी शुरू हो जाती है। इंसान भी कुत्तों की तरह हरकत करने लगता है और कुछ ही दिनों में दम तोड़ देता है। अगर पागल कुत्ते के काटने का शिकार इंसान किसी को काट ले तो उतना ही असर होगा। विशेषज्ञ बताते हैं कि कुत्ता, बंदर, बिल्ली के अलावा ऐसा कोई भी जीव जो जीभ से चाटकर पानी पीता है, काट ले तो एआरवी जरूर लगवाएं। इसमें गाय और भैंस नहीं आते हैं। उन्होंने कहा कि संभव हो तो काटने के तत्काल बाद इंजेक्शन लगवा लें। अगर नहीं पहुंच पा रहे हैं तो 12-24 घंटे में लगवा ही लेना चाहिए। जिससे खतरा टल जाता है।
- डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी, वरिष्ठ चिकित्सक, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
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बीते एक सप्ताह में एआरवी लगवाने पहुंचे मरीज
28 जून- कुल 13, बच्चे 6
29 जून- कुल 10, बच्चे 4
30 जून- कुल 7, बच्चे 2
दो जुलाई- कुल 12, बच्चे 0
तीन जुलाई, कुल 19, बच्चे 7
चार जुलाई- कुल 13, बच्चे 5
पांच जुलाई- कुल 11, बच्चे 4
छह जुलाई - कुल 14, बच्चे 6
सात जुलाई 16, बच्चे 6
आठ जुलाई - कुल 10, बच्चे 4
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जिले में नहीं है एआरवी की कमी
स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा समय में माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज और सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर छह हजार वायल उपलब्ध है। जिसमें लगभग 24 हजार डोज लगाई जा सकती है। मौजूदा समय में किसी अस्पताल पर इंजेक्शन की कोई कमी नहीं है।
- डॉ. बीके अग्रवाल, सीएमओ सिद्धार्थनगर
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इन जानवरों ने इतने लोगों को बनाया शिकार
वर्ष कुत्ता बंदर बिल्ली अन्य प्रजाति
2021 5555 219 742 177
2022 11614 1363 2102 524
नोट: 2023 में अब तक कुत्ता 2225, बिल्ली 352, बंदर 128, अन्य 147 लोगों को काट चुके हैं।
इनसेट-
कहता था मेरे अंदर हैं बहुत जहर, कुत्ता काटने का नहीं होगा असर... तीन माह में चली गई जान
बस्ती। नगर क्षेत्र के अगई भगाड़ निवासी सोनू सिंह और उनकी बेटी को को अप्रैल के पहले सप्ताह में उनके पालतू कुत्ते ने काट लिया था। सोनू ने बेटी को तो एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवा दिया, लेकिन खुद नहीं लिया। लोगों ने समझाया कि आप भी इंजेक्शन लगवा लीजिए, लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी। जब भी कोई उन्हें सलाह देता...कहते कि मेरे अंदर बहुत जहर है। कुत्ते के काटने का कोई असर नहीं होगा। कुछ दिनों तक वे ठीक रहे, लेकिन धीरे-धीरे उनकी तबीयत बिगड़ने लगी तो भी ध्यान नहीं दिया। दो जून को तेज बुखार हुआ। तीन जून को तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। वह कुत्ते की तरह भौंकने लगे और छह जून को तड़प-तड़प कर उनकी मौत हो गई। चिकित्सकों के मुताबिक, कुत्ता काटने के बाद एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगवाना अपनी जान को जोखिम में डालने के समान है। कुत्ता काटने के 24 घंटे के अंदर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवा लेना चाहिए। संवाद
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दस दिन में ही दिखने लगते हैं लक्षण
कुत्ते के काटने के बाद एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगवाने पर दस दिन में चक्कर आना, उल्टी, बुखार आदि आना शुरू हो जाता है। पूरी तरह रैबीज का असर एक से तीन माह में होता है।
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हवा, पानी व तेज आवाज से लगता है डर
रैबीज वायरस का शरीर में प्रवेश होने पर मरीज को हवा, पानी व तेज आवाज पर डर लगने लगता है। मरीज को बाहर निकलने में भी भय लगता है।