सिद्धार्थनगर। बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय में शनिवार को बुद्ध शिक्षा परिषद के संस्थापक पं. रामशंकर मिश्र की 13वीं पुण्यतिथि के मौके पर श्रद्धांजलि सभा की गई। पिछड़े जिले में शिक्षा की अलख जगाने, कपिलवस्तु के अन्वेषण, शाक्य प्रदेश की संकल्पना, एवं बाल विश्वविद्यालय के लिए उनके चिंतन एवं योगदान को लेकर चर्चा की गई।
प्रबंधक राजेश शर्मा ने बताया कि पं. रामशंकर मिश्र ने बुद्ध की धरती पर शिक्षा की दिव्य ज्योति जलाई थी, यह ज्योति हमेशा प्रज्जवलित होती रहेगी। यह क्षेत्र अत्यंत पिछड़ा था, आवागमन के संसाधन क्षेत्र में उपलब्ध नहीं थे। इस क्षेत्र के विकास की कल्पना मिश्र ने की थी, जिसका आधार शिक्षा के प्रसार को बनाया। उन्होंने कई शिक्षण संस्थानों की स्थापना की और इस क्षेत्र को जनपद को साकार रूप में लाने में अपनी भूमिका का निर्वहन किया। प्राचार्य प्रोफेसर अभय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जो कल्पना क्षेत्र के लिए मिश्र ने की थी, हम सभी उसको पूर्ण करने में पूरे मनोयोग से लगे हैं। महाविद्यालय में तीन विषयों हिंदी, समाजशास्त्र, राजनीत शास्त्र में पीजी एवं बीकाॅम की कक्षा की शुरुआत इसका परिणाम है।
उन्होंने कहा कि बौद्ध अध्ययन केंद्र की स्थापना से संबंधित प्रोजेक्ट शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार को भेजा गया है, जिसमें नई शिक्षा नीति 2020 के तहत पाली और प्राकृत भाषाओं को आगे बढ़ाने के लिए भारत सरकार की मंशा के अनुरूप सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा कोर्स शुरू कर सकेंगे। महाविद्यालय परिसर में पौधरोपण भी किया गया।
इस दौरान पूर्व प्राचार्य प्रह्लाद पांडेय, वीरेन्द्र पांडेय, अशोक मिश्र, प्रकाश चौधरी, मनोज मिश्र, रामचन्द्र यादव, राधा रमन त्रिपाठी, विनय कांत मिश्र, डॉ. शक्ति जायसवाल, अखंड प्रताप सिंह, राणा प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।