राज्य कर्मचारी का दर्जा मांग रहे डीआरडीए कर्मचारियों ने शनिवार को काम-काज ठप कर दिया। कार्य बहिष्कार कर परिसर में धरने पर बैठे कर्मचारियों ने मांगों के समर्थन में नारे लगाए और सरकार की उपेक्षात्मक रवैए के खिलाफ 10 मई को सामूहिक अवकाश लेकर लखनऊ में प्रदर्शन का ऐलान किया।
इस दौरान सांसद ने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए लोकसभा में मामला उठाने का आश्वासन दिया। डीआरडीए इंप्लाइज यूनियन जिला इकाई के बैनर तले कर्मचारी दो मई से ही आंदोलित हैं। अब तक काली पट्टी बांधकर विरोध जताते कर्मचारी शनिवार को कार्य बहिष्कार कर धरने पर बैठ गए।
धरने में वक्ताओं ने कहा कि डीआरडीए कर्मचारी अन्य कर्मचारियों की तरह की सभी तरह के शासकीय कार्य करते हैं, लेकिन सुविधाएं नहीं मिल रही। कर्मचारियों को वेतन, भत्ता सहित अन्य सुविधाओं के लिए लड़ाई लंबे समय से चली आ रही है।
प्रांतीय नेतृत्व ने अब करो या मरो का फैसला लिया है। इसके तहत सभी कर्मचारी उग्र आंदोलन के लिए कमर कस चुके हैं। मांगे पूरी होने तक लड़ाई जारी रहेगी। इस बार कोरे आश्वासन पर नहीं, बल्कि मूर्त रुप लेने के बाद ही आंदोलन खत्म किया जाएगा।
अध्यक्ष ईश्वर चंद्र शर्मा ने कहा कि 10 मई को सामूहिक अवकाश लेकर सभी डीआरडीए कर्मचारी लखनऊ पहुंचेंगे। वहां मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी मांगों को पुरजोर ढंग से रखा जाएगा। प्रदर्शन में विजय कुमार, शकील अहमद, राधाकृष्ण, आलोक चंद्र पांडेय, शिवपूजन, बरखू प्रसाद, शफीक अहमद, शिवकुमार, इमरान अहमद, रवींद्र श्रीवास्तव, शंभू शरण यादव, प्रवीन कुमार श्रीवास्तव, वजीहुद्दीन आदि मौजूद रहे। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष अनिल सिंह, शिवाकांत पांडेय और भूपेश शुक्ला ने भी आंदोलन को समर्थन दिया।