जिला अस्पताल की ओपीडी पर लगा ताला।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। डेंगू व चिकनगुनिया के बढ़ते प्रकोप को ध्यान में रखते हुए शासन ने रविवार को भी ओपीडी खोलने का निर्देश दिया था, मगर जिला अस्पताल प्रशासन पर इन फरमानों का कोई असर नहीं है। रविवार को यहां ओपीडी बंद रही। गेट पर ताला जड़ा रहा। इलाज की आस में दूर-दराज से आए मरीजों को बिना उपचार के ही निराश लौटना पड़ा। उनमें जिम्मेदारों के प्रति गुस्सा बना रहा।
100 बेड वाले जिला अस्पताल में किसी भी प्रकार से मरीजों को राहत मिलता नहीं दिख रहा है, क्योंकि जिनके कंधों पर जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह जिम्मेदार मरीजों की समस्या को लेकर गंभीर नहीं हैं। डेंगू व चिकनगुनिया के बढ़ते प्रकोप को ध्यान में रखते हुए शासन ने रविवार को भी ओपीडी खोलने का निर्देश दिया था, मगर आदेश यहां के स्वास्थ्य कर्मियों के लिए कोई मायने नहीं रखता है।
रविवार को अस्पताल का ओपीडी समय से पहले बंद मिला। ओपीडी व अस्पताल के मुख्य गेट पर समय से पहले ताला जड़ा हुआ था। सोहांस गांव से आए सुरेश ने बताया कि बच्चे बुखार है, रविवार को भी अस्पताल खुलने की सूचना पर यहां आया था। अब प्राइवेट डॉक्टर के पास जा रहे हैं। सूपा के गयादीन व पोखर भिटवा के उदयभान ने बताया कि रविवार को डॉक्टर बैठते हैं, इसलिए बेटी का इलाज के लिए आया था।
अस्पताल बंद होने से जांच नहीं हो सका है। अब किसको दिखाएं दवा कैसे होगी। इसी तरह इलाज के लिए आए कई मरीजों को वापस लौटना पड़ा। इस संबंध में सीएमएस डॉ. रोचस्मति पांडेय ने बताया कि डॉक्टरों की कमी है, मरीज नहीं रहे होंगे। इसलिए ओपीडी बंद कर दी गई होगी। वैसे भी इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। मरीजों को वहां भी देखा जाता है।