सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु की राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (नैक) तैयारी को लेकर मंगलवार को लखनऊ स्थित जन भवन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई, जिसमें प्रस्तुतीकरण से लेकर दस्तावेजी साक्ष्यों तक हर बिंदु पर गंभीरता बरतने के निर्देश दिए गए। बैठक में विश्वविद्यालय की तैयारियों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट कहा गया कि नैक मूल्यांकन में छोटी-छोटी कमियां भी भारी पड़ सकती हैं।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से आयोजित बैठक की अध्यक्षता विशेष कार्याधिकारी (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने की। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया कि नैक प्रस्तुतीकरण में सभी दावे प्रमाणिक दस्तावेजों, जियो टैग फोटो और गतिविधिवार साक्ष्यों के साथ शामिल किए जाएं।
बैठक में विश्वविद्यालय में रोजगारपरक और वोकेशनल कोर्स शुरू करने पर विशेष जोर दिया गया। खासतौर पर छात्राओं को रोजगार से जोड़ने वाले कोर्स, उनके प्रमाणपत्र और उससे हुए लाभ को भी नैक प्रस्तुतीकरण का हिस्सा बनाने को कहा गया।
समीक्षा के दौरान मेंटरिंग सिस्टम, स्लो लर्नर्स के लिए विशेष कक्षाएं, सीनियर-जूनियर अध्ययन सहयोग और सेल्फ असेसमेंट जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए गए। साथ ही अभिभावकों, संबद्ध कॉलेजों और संभावित नियोक्ताओं के फीडबैक को भी व्यवस्थित रूप से शामिल करने की बात कही गई।
बैठक में नेपाल, भूटान समेत पड़ोसी देशों के संस्थानों के साथ खेल, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियां बढ़ाने तथा उन्हें अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत करने पर भी जोर दिया गया।
विशेष कार्याधिकारी ने विश्वविद्यालय परिसर में मियावाकी वन विकसित करने की जरूरत बताते हुए कहा कि इससे पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा। बैठक में प्रो. कविता शाह, विशेष कार्याधिकारी (शिक्षा) डॉ. पंकज एल. जानी, नैक टीम के सदस्य और जन भवन के अधिकारी मौजूद रहे।