गोरखपुर मिर्जापुर के पास नदी में नहा रहे लोग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भीषण गर्मी में राहत पाने के लिए खतरों से अनजान बच्चे नदियों में नहाने पहुंचे रहे हैं और मौत की छलांग लगा रहे हैं। लगातार डूबने से हो रही मौतों के बाद सुरक्षा और बचाव के इंतजाम नाकाफी हैं। जिले में 200 आपदा मित्र और 143 गोताखोर तैनात हैं पर हकीकत में इनकी खोज-खबर किसी को नहीं है।
हादसे के वक्त इन्हें ढूंढते रह जाएंगे। बुधवार को कुछ ऐसे हॉट स्पॉट की अमर उजाला टीम ने पड़ताल की। दो-तीन वर्षों में डूबने से जहां ज्यादा मौतें हुई हैं, वहां भी सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं मिला।
मिर्जापुर गांव में दो साल में 10 बच्चे डूबे, संकेतक न लाइफ जैकेट
खोराबार के मिर्जापुर गांव में तीन वर्ष में 10 किशोरों की मौत हो चुकी है। इस वर्ष भी चार बच्चे रील बनाते समय डूब गए थे। उस वक्त ग्रामीणों को आश्वस्त किया गया था कि पुलिस की तैनाती की जाएगी और मासूमों को नदी में नहाने से रोका जाएगा पर कोरा आश्वासन ही रह गया।
यहां न तो खतरे से आगाह करते संकेतक लगाए गए और न ही लाइफ जैकेट या हवा भरी ट्यूब की व्यवस्था की गई। बुधवार को बच्चे नदी में छलांग लगाते दिखे।
यहां के निवासी शशिभूषण पांडेय ने बताया कि 2025 में अप्रैल और मई में मिर्जापुर घाट पर छह लोगों की डूबने से मौत हुई थी। इस वर्ष भी चार मासूम बच्चों की डूबने से मौत हो गई लेकिन सुरक्षा व बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए गए। वे कहते हैं, हादसों के बाद पूरे गांव के लोग चाहते हैं कि मिर्जापुर घाट पर नहाने के लिए रोक लगाई जाए।