फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पर्यावरण बचाएं: अमर उजाला संवाद में महिलाओं ने उठाई आवाज; कहा- सिविक सेंस लाएं, कचरा न फेंके, पेड़ बचाएं

Wed, 27 May 2026 12:30 PM IST
Rohit Singh अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने शहर की सफाई, पर्यावरण संरक्षण और विकास से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। महिलाओं ने बढ़ती गंदगी और प्लास्टिक के उपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कपड़े या जूट के बैग का इस्तेमाल करें और प्लास्टिक का प्रयोग कम करें। 
विज्ञापन
अमर उजाला कार्यालय में मंगलवार को आयोजित संवाद में शहर की महिलाओं ने हिस्सा लिया - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कचरे का सही तरीके से निस्तारण करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि लोग गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग डालें और सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी न फैलाएं, तो शहर को स्वच्छ और स्वस्थ बनाया जा सकता है।

विज्ञापन

अमर उजाला कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में महिलाओं ने शहर की सफाई, पर्यावरण संरक्षण और विकास से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी।

महिलाओं ने बढ़ती गंदगी और प्लास्टिक के उपयोग पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कपड़े या जूट के बैग का इस्तेमाल करें और प्लास्टिक का प्रयोग कम करें। कार्यक्रम में पेड़ों की कटान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा।

वक्ताओं ने कहा कि विकास कार्य जरूरी हैं लेकिन इसके साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। चर्चा के दौरान नगर की सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाने, जगह-जगह कूड़ेदान लगाने तथा लोगों को जागरूक करने पर जोर दिया गया। महिलाओं ने कहा कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर प्रयास करें तो स्वच्छ और हरित वातावरण का सपना साकार हो सकता है।

स्नेहिल नारी संस्थान की सदस्य सविता सिंह ने कहा कि हर जगह पेड़ों की कटाई हो रही है। जहां सड़क निर्माण हो रहा है, वहां पेड़ों को बचाया जाना चाहिए। पेड़ और पेयजल की समस्या का समाधान जरूरी है। महेश्वरी सिंह ने कहा कि निर्माण कार्यों को जल्द पूरा किया जाना चाहिए।

साधना विश्वकर्मा ने कहा कि करीमनगर से पादरी बाजार आने में काफी दिक्कत होती है। निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। लोग नालियों में कचरा डाल रहे हैं, जिससे ओवरफ्लो की समस्या हो रही है। पैदल चलने वालों को परेशानी होती है। असुरन से मोहद्दीपुर तक का रास्ता पहले काफी ठंडा महसूस होता था, लेकिन अब वहां तेज धूप लगती है।

सुनीता सिंह ने कहा कि नौका विहार क्षेत्र में अक्सर जाम लगता है। सड़क किनारे ठेले लगते हैं। जो महिलाएं ठेला लगाकर रोजगार कर रही हैं, उनके लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए। दीप्ती अग्रवाल ने कहा कि आग लगने की स्थिति में पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। घंटाघर क्षेत्र में फायर स्टेशन होना चाहिए।

संकरी गलियों में लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। लोग बाहर कचरा भी फेंकते हैं। लालडिग्गी रोड पर अक्सर वाहन फंस जाते हैं और वहां नाला भी ऊंचा बना हुआ है। माया कॉम्प्लेक्स के सामने दुकानों के बाहर गंदगी रहती है। नई उमंग संस्था की सीता रुंगटा ने कहा कि बैंक रोड पर काफी दुर्घटनाएं होती हैं।

सड़क समतल नहीं है, जिससे बच्चे अक्सर गिर जाते हैं। नाला ऊंचा बना होने से ई-रिक्शा भी पलट चुका है। मारवाड़ी युवा मंच की कविता गोयल ने कहा कि सड़कों पर अतिक्रमण बढ़ गया है। मेडिकल रोड पर दुकानदारों ने सामान सड़क तक फैला रखा है। मोहद्दीपुर से कुनराघाट तक कट काफी दूर होने से लोगों को परेशानी होती है।

एडवोकेट पूजा गुप्ता ने कहा कि गोरखपुर में काफी बदलाव आया है। आज महिलाएं पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हैं। कार्यक्रम में मुक्तकेशी त्रिपाठी, डिंपल शुक्ला, अर्चना सिंह, सुमन लता सहाय ने भी अपनी बात रखी।

विजय चौराहे के पास लोग कूड़ा डंप कर चले जाते थे। इसे हटाने के लिए नगर आयुक्त को निर्देश दिए गए, जिसके बाद वहां से कूड़ा हटाया गया। शहर में अभी भी कई जगह गंदगी की समस्या है। जनता समस्याएं लेकर आएगी तो उनका समाधान किया जाएगा। सीबीएसई बोर्ड में भी कई तरह की गड़बड़ियां हैं। कॉपी निकलवाई गई तो वह काफी ब्लर थी। जन उपयोगी सेवाओं में जहां भी दिक्कत हो, वहां आवाज उठाने की जरूरत है: संगीता प्रकाश त्रिपाठी, मेंबर जज, लोक अदालत, सिविल कोर्ट

वह लावारिस दिव्यांग महिलाओं को सड़क से उठाकर आश्रम में रखती हैं। लावारिस शवों का अंतिम संस्कार भी कराती हैं। पुलिस की सूचना पर हिंदू और मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार अलग-अलग अंतिम संस्कार किया जाता है। हर महीने ब्लड डोनेशन कैंप भी आयोजित करती हैं। कॉलोनियों में सफाई की स्थिति खराब है। नालियों पर कब्जा कर लिया गया है और स्लैब सड़क तक बढ़ा दिए गए हैं। कुछ लोग कोनों में कचरा फेंक देते हैं:  पुष्पलता सिंह, मातृ आंचल सेवा संस्थान

आज भी कई महिलाएं कुछ करना चाहती हैं, लेकिन उनके पास उचित प्लेटफॉर्म नहीं है। ऐसी महिलाओं के उत्पादों को मंच उपलब्ध कराया जाना चाहिए। कई महिलाएं अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहती हैं, लेकिन उन्हें सही दिशा नहीं मिल पाती: संगीता पांडेय, उद्यमी

नकहा ओवरब्रिज के नीचे गंगानगर कॉलोनी में मजदूर टिनशेड डालकर रहते हैं। वहां 30 से 40 बच्चे हैं, जो दिनभर घूमते रहते हैं लेकिन पढ़ाई नहीं करते। उनकी पूरी पीढ़ी बर्बाद हो रही है: सीमा पांडेय, सचिव, स्नेहिल नारी संस्थान
विज्ञापन

अमर उजाला कार्यालय में मंगलवार को आयोजित संवाद में शहर की महिलाओं ने हिस्सा लिया - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
महिलाएं अभी भी कई मुद्दों को लेकर सक्रिय नहीं हैं। उन्हें जागरूक करने की कोशिश की जाती है, लेकिन अभी काफी कमी है। महिलाएं जो भी उत्पाद बनाती हैं, उन्हें बाजार तक पहुंचाने में मदद की जाएगी। पेड़ों की कटाई से गर्मी बढ़ गई है। नल के पानी से बदबू आती है, इसलिए मजबूरी में आरओ का पानी पीना पड़ता है। तेज डीजे की आवाज से घरों के शीशे तक हिलने लगते हैं: तनु शर्मा, सनराइज एजुकेशनल ट्रस्ट

गोरखपुर में सिविक सेंस की जरूरत है। छात्रसंघ चौराहे के पास डॉक्टरों के क्लीनिक हैं लेकिन लोग सड़क पर कचरा फेंक देते हैं। नाला बनते ही उसमें कचरा भर जाता है। पहले गोरखपुर को बड़ा देहात कहा जाता था लेकिन अब लोग इसे शहर कहते हैं। यदि हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी निभाए तो शहर अपने आप सुंदर हो जाएगा। हर काम सरकार नहीं कर सकती: प्रियंका अग्रवाल, नई उमंग संस्था

छात्रसंघ चौराहे के पास कुछ अस्पतालों के सामने रात में कचरा पड़ा रहता है। लोगों ने अतिक्रमण कर मकान बना लिए हैं, जिससे वहां से गुजरने में परेशानी होती है। सरकारी दफ्तरों में सफाई व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए। कोर्ट परिसर में भी काफी गंदगी रहती है: डॉ. प्रियंका सिंह, महिला अस्पताल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें