बढ़नी के अहिरौला में बंद पड़ा पीएचसी।
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परसा। समय से ड्यूटी स्थल पहुंचने का फरमान जारी हुए 48 घंटे बीत चुका है, मगर जिले का स्वास्थ्य महकमा सुधरने का नाम नहीं ले रहा। जिला अस्पताल जैसे हालात ही ग्रामीण अस्पतालों के भी हैं। वहां तक किसी के न पहुंचने का इत्मीनान कर बैठे चिकित्सक-कर्मचारी पूरी तरह मनमानी पर उतारु हैं। आलम यह है कि 11 बजे तक भी इन अस्पतालों का ताला ही नहीं खुल पा रहा।
शुक्रवार को बढनी ब्लाक के नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अहिरौला की यही स्थिति रही। सुबह 10.53 बजे तक इस अस्पताल के मुख्य गेट पर ताला लगा था। इलाज कराने आए कई ग्रामीण ताला खुलने के इंतजार में बाहर खड़े दिखाई दिए। ग्रामीण पिंटू चौरसिया का कहना था कि यहां हर रोज यही तस्वीर रहती है। अस्पताल पर तैनात फार्मासिस्ट नौगढ़-बढ़नी पैसेंजर ट्रेन से आता है तो ताला खुलता है और तीन बजे बंद कर लौट जाता है। ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण कभी चेकिंग भी नहीं होती। इलाज कराने आई सुरसती देवी ने बताया कि सरकारी अस्पताल की ऐसी व्यवस्थाओं के चलते ही चट्टी-चौराहों पर स्थित अप्रशिक्षित डॉक्टरों से महंगा इलाज कराने को लोग बाध्य हो रहे हैं। अब सूबे में नई सरकार के आने के बाद उम्मीद जगी थी, लेकिन कर्मचारियों के रवैए से तो सुधार की गुंजाइश नहीं लगती।
लेटलतीफी के बाबत फार्मासिस्ट अशोक कुमार का कहना था कि वह समय से अस्पताल पहुंच गए थे। ग्रामीण झूठ बोल रहे हैं। बता दें कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अहिरौला पहले भुतहिया में एक प्राइवेट मकान में संचालित था। लगभग पांच वर्ष पूर्व तुलसियापुर चौराहे के निकट अहिरौला बाग में इसे स्थानांतरित किया गया। अहिरौला, औदही कलां, तुलसियापुर, मानपुर, गडऱखा, मनिकौरा, चरिहवां, मटियार उर्फ भुतहवा, खैरहनिया, केवटलिया, जलापुरवा समेत दो दर्जन से अधिक गांवों के हजारों लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए जिम्मेदार यह अस्पताल शुरू से ही चिकित्सक विहीन है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. राजेंद्र कपूर का कहना था कि लेटलतीफी के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। बताया कि शीघ्र ही ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि सारी खामियां दूर हो जाएंगी।