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Siddharthnagar News: नेपाल में मतदान बॉर्डर पर चौकसी, सख्त रहा पहरा

Thu, 05 Mar 2026 11:13 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। नेपाल में बृहस्पतिवार को नई सरकार को चुनने के लिए वोट डाले गए। मतदान को देखते हुए एसएसबी और सीमावर्ती थानों की पुलिस अलर्ट मोड में रही। बाॅर्डर सील कर निगरानी की जा रही थी। पगडंडियों के रास्ते कोई सीमा में न जा सके, इसके लिए पूरे दिन सीमावर्ती थानों की पुलिस और एसएसबी के जवान मार्च करते रहे। इसके साथ ही बाॅर्डर को सील होने के कारण वहां पर पूरी तरह से सन्नाटा छाया।
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दो मार्च की रात से ही बाॅर्डर बंद है, जिसका असर बुधवार और बृहस्पतिवार को बाॅर्डर एरिया के बाजार और दुकानों पर देखने को मिला। बाजार में सन्नाटे जैसी स्थिति बनी रही। कारोबारियों का कहना था त्योहार में दो दिन की बंदी के कारण कारोबार प्रभावित हुआ है, लेकिन बहुत नुकसान नहीं है। वहीं, बाॅर्डर पर बसे लोग नेपाल में चुनाव के बारे में पल-पल की जानकारी लेते हुए नजर आए। रेडिया, फोन और अन्य माध्यम से पूरे दिन चुनाव की चर्चा होती रही।
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अलर्ट रही सुरक्षा एजेंसी, पगडंडियों पर विशेष पहरा
जनपद की 68 किलोमीटर सीमा नेपाल बाॅर्डर से लगती है। यहां ककरहवा, अलीगढ़वा, खुनुवां और बढ़नी नेपाल जाने के मुख्य सेंटर हैं। इसमें बढ़नी और खुनुवां बाॅर्डर से ट्रेड यानी खाद्यान सहित अन्य सामग्री लेकर निकलती है जबकि, ककरहवा में केवल बस और अन्य चार पहिया वाहन आते-जाते हैं। यहां से ट्रेड के वाहन नहीं निकलते हैं जबकि, अलीगढ़वा बाॅर्डर से केवल दो पहिया वाहन ही निकलते हैं। इसके अलावा सीमा पूरी तरह से खुली हुई है। यहां गश्त के जरिये ही बाॅर्डर की निगरानी की जाती है। नेपाल में बृहस्पतिवार को मतदान सुबह तय समय पर शुरू हुआ। सीमा दो मार्च की रात में ही सील कर दी गई थी। सीमा पर जहां दोनों देशों के जवान अलर्ट थे। वहीं, मतदान को देखते हुए सीमावर्ती थाना लोटन, मोहाना, कपिलवस्तु, शोहरतगढ़, ढेबरुआ थाने की पुलिस और एसएसबी की ओर से पूरी सीमा पर पगडंडियों पर सघन जांच की और पैदल मार्च करके सुरक्षा का जायजा लेते हुए देखे गए। बाॅर्डर पर दिखने वालों को घर जाने की हिदायत देते रहे। वहीं, नेपाल सशस्त्र बल के जवान भी अलर्ट मोड में नजर आए। वह भी पगडंडी के मार्ग पर मार्च करते हुए दिखे और माइक से अनाउंस करते हुए नजर आए। मुख्य बाॅर्डर पर तो सन्नाटा नजर आया। हालांकि, रात में सीमा खुल जाएगी, शुक्रवार से आवाजाही सामान्य हो जाएगी।
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सीमा सील कारोबार पर असर
नेपाल चुनाव में त्योहार के बीच सीमा सील होने का असर कारोबार पर देखने को मिला। सीमावर्ती नेपाल के इलाके के लोगों के लिए ककरहवा, अलीगढ़वा, खुनुवां और बढ़नी मुख्य बाजार है। बाॅर्डर से 30 किलोमीटर से अधिक के दायरे में नेपाल में रहने वालों की निर्भरता भारतीय बाजार पर है। नेपाल से आकर साप्ताहिक बाजार करते हैं। इसके लिए नियमित खाद्यान और अन्य घरेलू बाजार करने के लिए हजारों की संख्या में लोग आते हैं। सीमावर्ती इलाके के लोगों का कारोबार का बड़ा हिस्सा नेपाल के लोगों पर निर्भर है। दो मार्च की रात में बाॅर्डर सील हो गया। तीन और चार मार्च को त्योहार पर पूरी तरह से बंदी रही। बृहस्पतिवार को चुनाव के दिन भी बाजार बंद रहे। यानी तीन दिन पूरी तरह से बंदी रही।
ककरहवा बाजार में दुकान करने वाले रामगोपाल ने बताया कि होली के बीच बाॅर्डर की तीन दिन बंदी से कारोबार पर असर पड़ा है। होली नेपाल में भी मनाया जाता है, वहां के लोग खरीद करते हैं। बहुत नुकसान इसलिए नहीं कहा जाएगा कि सीमा सील होने की जानकारी के कारण अधिकांश लोग पहले ही जरूरी सामान खरीदकर लेकर जा चुके हैं। वहीं, अलीगढ़वा में किराना की दुकान करने वाले रिंकू ने बताया कि होली का बाजार बंदी के चलते फीका हो गया। त्योहार हम लोगों के लिए कमाई का मुख्य समय रहा। इसी प्रकार बढ़नी और खुनुवां बाजार में असर देखने को मिला। बढ़नी से जुड़े कारोबारियों ने बताया कि बंदी की जानकारी के कारण आठ दिन पहले से बिक्री तेज हो गई थी। दो दिन में सारी भरपाई हो जाएगी। हर बार चुनाव में ऐसा होता है।
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कपिलवस्तु में हार-जीत को लेकर दिनभर लगते रहे कयास
खुनुवां। सीमा से सटे नेपाल के कपिलवस्तु जिले में बृहस्पतिवार को हो रहे प्रतिनिधि सभा चुनाव के दौरान तीनों निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवारों की हार-जीत को लेकर आम लोगों के बीच दिनभर चर्चाओं और कयासों का दौर चलता रहा। कहीं अपने पसंदीदा प्रत्याशी के बढ़त की खबर से समर्थकों में उत्साह नजर आया। कहीं पिछड़ने की आशंका से मायूसी का माहौल भी देखने को मिला। यह हाल बाॅर्डर इस पार भारतीय क्षेत्र और नेपाल में देखने को मिला।
कपिलवस्तु जिले के मुख्यालय तौलिहवा निवासी केपी शर्मा (जानसन), जो नेपाली कांग्रेस के समर्थक हैं और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थक मदन गुप्ता ने बताया कि क्षेत्र नंबर 1 में नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार अतहर कमाल और निर्दलीय उम्मीदवार आशीष शर्मा के बीच कांटे की टक्कर मानी जा रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार आशीष शर्मा की जीत की संभावना प्रबल मानी जा रही है। क्षेत्र नंबर-2 में नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार सुरेंद्र आचार्य और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवार बृजेश कुमार गुप्ता आमने-सामने हैं। यहां भी दोनों प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है, हालांकि लोगों के अनुसार सुरेंद्र आचार्य को बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही है।
वहीं, क्षेत्र नंबर-3 में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार प्रकाश राजौरिया और नेपाली कांग्रेस के अभिषेक प्रताप शाह के बीच मुकाबला बेहद रोचक बना हुआ है। दोनों उम्मीदवारों के समर्थकों में जबरदस्त उत्साह है और परिणाम किसके पक्ष में जाएगा, इसे लेकर लोगों में उत्सुकता बनी हुई है। कुल मिलाकर कपिलवस्तु जिले के तीनों निर्वाचन क्षेत्रों में चुनावी माहौल काफी गरम रहा और आम जनता दिनभर संभावित नतीजों को लेकर चर्चा करती नजर आई। अब सभी की निगाहें अंतिम परिणामों पर टिकी हुई हैं।
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क्षेत्र-1 में 19 दलों के 34 उम्मीदवार मैदान में
खुनुवां। पड़ोसी देश कपिलवस्तु जिला (नेपाल) में प्रतिनिधि सभा चुनाव के लिए तीनों निर्वाचन क्षेत्रों में शांतिपूर्ण ढंग से मतदान चल रहा है। जिले के सभी मतदान केंद्रों पर मतदाताओं में उत्साह देखा गया। क्षेत्र संख्या-1 में कुल 79 मतदान स्थल और 179 मतदान केंद्र बनाए गए थे। इस क्षेत्र में 19 राजनीतिक दलों के 34 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिसमें 15 निर्दलीय हैं। क्षेत्र में कुल 1,47,659 मतदाता पंजीकृत हैं, जिनमें 77,646 पुरुष (लगभग 52.58 प्रतिशत) और 70,009 महिलाएं (लगभग 47.44 प्रतिशत) शामिल हैं।
क्षेत्र संख्या-2 में 84 मतदान स्थल और 163 मतदान केंद्र बनाए गए थे। यहां 11 निर्दलीय सहित कुल 28 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इस क्षेत्र में कुल 1,30,202 मतदाता हैं, जिनमें 70,264 पुरुष (करीब 53.91 प्रतिशत) और 59,938 महिलाएं (करीब 46.03 प्रतिशत) हैं। इसमें 26 पुरुष व दो महिलाएं मैदान में हैं। क्षेत्र संख्या–3 में 72 मतदान स्थल और 148 मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे। यहां राजनीतिक दलों के 17 व निर्दलीय 23 उम्मीदवार मैदान में हैं। इस क्षेत्र में कुल 1,18,404 मतदाता हैं, जिनमें 63,936 पुरुष (करीब 54 प्रतिशत) और 54,468 महिलाएं (करीब 46 प्रतिशत) शामिल हैं। इस क्षेत्र में 36 पुरुष और शून्य महिला उम्मीदवार अपने किस्मत आजमा रहे हैं। चुनाव के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। शाम 5 बजे मतदान समाप्त होने के बाद अब सभी की निगाहें मतगणना और परिणामों पर टिकी हुई हैं।
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उस पार चुनाव, इस पार जीत-हार का कयास
तुलसियापुर।नेपाल में संसदीय चुनावों के लिए मतदान शुरू हो गया है। यह चुनाव पिछले वर्ष सितंबर में युवा-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के बाद पहला आम चुनाव है। उन प्रदर्शनों में 77 लोगों की मौत हुई थी और सरकार को इस्तीफा देना पड़ा था। 18.9 लाख से अधिक पात्र नेपाली नागरिक प्रत्यक्ष मतदान के माध्यम से 165 सीटों के लिए चुनाव लड़ रहे 3,406 उम्मीदवारों और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के माध्यम से 110 सीटों के लिए चुनाव लड़ रहे 3,135 उम्मीदवार मैदान में हैं। भारत-नेपाल सीमावर्ती इलाकों में चुनाव को लेकर काफी चर्चा रही।
पार्टी और प्रत्याशी के समर्थक भारतीय क्षेत्र के चाय-पानी की दुकानों पर अपने-अपने प्रत्याशियों के जीत का दावा करते रहे। नेपाल के लुंबिनी प्रदेश के कपिलवस्तु क्षेत्र संख्या तीन प्रतिनिधि सभा के चुनाव में आठ दलीय प्रत्याशी के अलावा 24 निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। चुनावी समीक्षकों के मुताबिक चुनावी लड़ाई चतुष्कोणीय है। नेपाली कांग्रेस के प्रत्याशी और कई बार सांसद रहे अभिषेक प्रताप शाह, नेकपा (एमाले) के वीरेंद्र कुमार कान्नोडिया, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के प्रकाश रजौरिया, राष्ट्रिय मुक्ति पार्टी नेपाल (एकल चुनाव चिह्न) के ईश्वर दयाल मिश्र के अलावा अन्य चार पार्टियों से भी प्रत्याशी हैं। पिछले चुनाव में नेकपा (एमाले) के प्रत्याशी मंगल गुप्ता ने जीत हासिल की थी और नेपाली कांग्रेस के प्रत्याशी अभिषेक प्रताप शाह दूसरे स्थान पर रहे थे। प्रकाश रजौरिया व ईश्वर दयाल मिश्र क्रमश तीसरे व चौथे स्थान पर रहे थे। इस बार नेकपा एमाले ने अपना प्रत्याशी बदल कर वीरेंद्र कुमार कन्नोडिया को टिकट दिया है। इन्हीं चारों प्रत्याशियों के बीच मुकाबले की बात लोग बता रहे हैं।
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नेपाल में मतदाताओं को दिए जाते हैं दो बैलेट पेपर

तुलसियापुर। नेपाल की संसद, जिसे प्रतिनिधि सभा कहा जाता है, इसमें कुल 275 सीटें हैं। इन्हीं 275 सांसदों को चुनने के लिए यह चुनाव कराया जा रहा है। नेपाल में चुनाव एक खास व्यवस्था के तहत होते हैं, जिसे मिक्स्ड इलेक्टोरल सिस्टम कहा जाता है। इसका मतलब है कि यहां दो अलग-अलग तरीकों से सांसद चुने जाते हैं। इसलिए मतदान के समय मतदाताओं को दो बैलेट पेपर दिए जाते हैं।
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नेपाल में मिश्रित चुनाव प्रणाली लागू है, यानी सांसद चुनने के दो तरीके होते हैं।
1. पहला वोट - उम्मीदवार के लिए
पहले बैलेट पेपर में मतदाता अपने क्षेत्र के किसी एक उम्मीदवार को वोट देता है, जिस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, वही जीत जाता है। इसे फर्स्ट पार्ट आप पोल (एफपीटीपी) सिस्टम कहा जाता है। इस तरीके से 165 सांसद चुने जाते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर किसी सीट पर पांच उम्मीदवार हैं और उनमें से एक को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, तो वही सांसद बन जाता है।
2. दूसरा वोट - पार्टी के लिए
दूसरे बैलेट पेपर में मतदाता किसी उम्मीदवार को नहीं बल्कि एक राजनीतिक पार्टी को वोट देता है। पूरे देश में पार्टी को जितने प्रतिशत वोट मिलते हैं, उसी हिसाब से उसे संसद में सीटें मिलती हैं। इसे आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली कहा जाता है। इस तरीके से 110 सांसद चुने जाते हैं। उदाहरण के लिए अगर किसी पार्टी को देशभर में 10 प्रतिशत वोट मिलते हैं तो उसे लगभग उतनी ही सीटें दी जा सकती हैं। इस तरह नेपाल में कुछ सांसद सीधे जनता के वोट से चुने जाते हैं, जबकि कुछ सांसद पार्टियों को मिले कुल वोट प्रतिशत के आधार पर तय होते हैं।
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