संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में लगभग 2262 परिषदीय विद्यालयों में सात हजार शिक्षक हैं। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार जिले में 2500 शिक्षकों की और आवश्यकता है। उसके बाद भी विद्यालयों में विद्यार्थियों की अपेक्षा शिक्षकों की कमी को दूर किया जा सकता है। शिक्षकों की कमी से पठन-पाठन में परेशानी हो रही है।
परिषदीय स्कूलों की दशा सुधारने के साथ ही छात्रों की शैक्षिक गुणवक्ता बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग तत्पर है, लेकिन शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाया जा रहा है। शिक्षकों की कमी से जहां शिक्षण प्रभावित होता है वहीं शिक्षकों को भी कठिनाइयों के दौर से गुजरना पड़ता है। जिले में 2262 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं।
इनमें लगभग तीन लाख विद्यार्थीअध्ययनरत हैं। उनको पढ़ाने के लिए जिले में लगभग सात हजार शिक्षक तैनात हैं। जबकि अभी 2500 से अधिक शिक्षकों की आवश्यकता है। प्राथमिक स्तर पर बड़ी संख्या में शिक्षकों की कमी शिक्षण कार्य में कहीं न कहीं बाधा उत्पन्न कर रही है। ऐसे में ज्यादा विद्यार्थी संख्या वाले स्कूलों में बच्चों को संभालने के लिए गुरुजनों को मशक्कत करनी पड़ती है।
इस वजह से तीन-तीन कक्षाओं के संचालन का जिम्मा एक ही शिक्षक पर है। इसका असर बच्चों के पठन-पाठन पर पड़ रहा है। ऐसे में स्मार्ट क्लास के संचालन में शिक्षकों की कमी आड़े आना तय माना जा रहा है।