नौगढ़ रेलवे स्टेशन का हाल; गोरखपुर तेल डिपो से चार माह से नहीं मिला डीजल, उधारी मंगाया जा रहा डीजल
सिद्धार्थनगर। नौगढ़ रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाएं नदारद है। यहां यात्रियों के बैठने के लिए बना छाजन और पानी की टोटियां टूटी हुई है। बिजली गुल हो जाने पर स्टेशन परिसर अंधेरे में डूब जाता है।
चार माह से डीजल नहीं मिलने से जनरेटर बंद रहता है। यहां यात्रियों को सबसे अधिक खतरा छुट्टा पशुओं से बना हुआ है। अमर उजाला टीम ने रविवार को स्टेशन का जायजा लिया तो स्थिति कुछ यूं मिली।
24 नवंबर 2013 को तत्कालीन रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने नौगढ़ को आदर्श रेलवे स्टेशन में तब्दील करने का एलान किया था। ढाई वर्ष बीतने के बाद भी रेलवे स्टेशन की स्थिति जस की तस बनी हुई है। पेयजल के लिए यात्रियों को भटकना पड़ रहा है।
अधिकांश टोटियां गायब हैं। अगर कहीं लगी हुई है तो खराब है। एक वाटर कूलर लगा है, लेकिन काम नहीं कर रहा। बिजली सप्लाई पर स्टेशन की रोशनी व्यवस्था टिकी हुई है। गोरखपुर तेल डिपो से चार माह से डीजल नहीं मिला है।
औसत 400 लीटर प्रतिमाह खपत के लिए नगर के एक पंप से उधारी पर ईंधन मंगाया जा रहा है। ट्रेन आने से दस मिनट पूर्व जनरेटर चलाया जाता है और जैसे गाड़ी गुजर जाती है वैसे ही जनरेटर बंद कर दिया जाता है। गर्मी के मौसम में भी पंखा खराब पड़ा है।
चार के सापेक्ष दो सफाई कर्मियों के कंधों पर साफ-सफाई की व्यवस्था टिकी हुई है। स्टेशन पर दो शौचालय बने है। दोनों पर ताला लटक रहा था। जरूरतमंदों को चाभी के लिए स्टेशन अधीक्षक के पास दौड़ लगाने की मजबूरी है।
प्लेटफार्म पर छुट्टा पशुओं की भरमार है। हमेशा दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। वाणिज्य अधीक्षक ए के मिश्रा बताते है कि डीजल की डिमांड गोरखपुर डिपो से की गई है। चार माह से डीजल नहीं मिल पाया है, जल्द ही डीजल मिलने की उम्मीद है, उसके बाद प्रकाश की व्यवस्था ठीक हो जाएगी।