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निकाय चुनाव समीक्षा : गुटबाजी और बगावत से सिमटा भाजपा की जीत का दायरा

Tue, 16 May 2023 11:49 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। निकाय चुनाव का परिणाम आने के बाद से जीत-हार की समीक्षा का दौर जारी है। टिकट न मिलने कुछ नेताओं ने बगावत कर चुनौती पेश की तो तमाम नेताओं ने भितरघात करके अपने ही दल के प्रत्याशी को चारों खाने चित कर दिया। वहीं, कुछ नेता ऐसे भी रहे, जिन्होंने टिकट न मिलने पर बगावत तो नहीं की, लेकिन पर्दे के पीछे से चालें चलकर अपनी पार्टी का नुकसान करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। चुनाव के दौरान हुई इन सारी राजनीतिक तिकड़मबाजी का सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को और उसके बाद सपा को उठाना पड़ा।
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जिले की दो नगर पालिकाओं और नौ नगर पंचायतों में से छह पर भाजपा ने कब्जा किया, तो दो पर सपा और एक सीट पर बसपा ने जीत दर्ज की। बाकी दो सीटों पर निर्दलियों ने बड़ी उलटफेर करते हुए राजनीतिक दलों के उम्मीदावारों को चित कर दिया।

नगर पालिका सिद्धार्थनगर के साथ नगर पंचायत कपिलवस्तु, बढ़नी, शोहरतगढ़ व डुमरियागंज में भाजपा के बागियों ने पार्टी की ओर से घोषित प्रत्याशियों के सारे समीकरण बिगाड़ दिए। नगर पालिका सिद्धार्थनगर में तीन मजबूत बागी उम्मीदारों से पार पाते हुए भाजपा प्रत्याशी गोविंद माधव कड़े मुकाबले के बीच जीत दर्ज करने में सफल रहे।
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लोगों ने चर्चा है कि इस चुनाव में जो जिसके साथ दिख रहा था, उसी के साथ नहीं था। यही कारण रहा है कि यहां मतदान के अंतिम दौर तक जीत पर संशय बना हुआ था।
अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित नवसृजित नगर पंचायत कपिलवस्तुु में पहली बार हुए चुनाव में भाजपा को बगावत की मार झेलनी पड़ी। पार्टी के एक बड़े नेता ने खुलकर निर्दल प्रत्याशी का समर्थन किया और राजनीतिक समीकरण बिगड़ा। बागी नेता अपने प्रत्याशी को जीत तो दिला नहीं पाए, लेकिन भाजपा को हराने में सफल जरूर रहे और जीत का सेहरा सपा उम्मीदवार आरती देवी के सिर बंध गया गया।
नगर पंचायत शोहरतगढ़ की बात करें तो इस सीट को भाजपा की सबसे सुरक्षित सीट के रूप में देखा जा रहा था। भाजपा की बागी प्रत्याशी रितु सिंह और निर्दल प्रत्याशी उमा अग्रवाल ने चुनावी रुख को बदल कर रख दिया। इन दोनों के बीच कांटे की टक्कर में सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशी हवा हो गए और निर्दल प्रत्याशी उमा अग्रवाल ने जीत दर्ज की। भाजपा के खाते में रही इस सीट से एक बार फिर चुनावी मैदान में उतरी बबिता कसौधन को तगड़ी शिकस्त मिली और वह तीसरे स्थान पर पहुंच गईं।
नगर पंचायत डुमरियागंज की बात करें तो यहां भाजपा के बागी के मैदान में उतरने से और सपा में हुए भितरघात के चलते दोनों दलों के प्रत्याशियों को हार का मुंह देखना पड़ा और यह सीट एक बार फिर बसपा के खाते में चली गई। कांटे की लड़ाई में बसपा की साजिया ने जीत दर्ज की, भाजपा को दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा तो सपा चौथे स्थान पर पहुंच गई। सत्ताधारी दल भाजपा की सबसे खराब स्थिति नगर पंचायत बढ़नी में देखने को मिली, जहां पार्टी प्रत्याशी विनीत कमलापुरी अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। यहां भाजपा से बगावत कर निर्दल उम्मीदवार के रूप मे चुनावी मैदान में उतरे सुनील अग्रहरि ने जीत दर्ज की।
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सपाई दिग्गज और विधायक नहीं बचा पाए प्रतिष्ठा से जुड़ी सीट
सिद्धार्थनगर। भाजपा की तरह सपा को भी निकाय चुनाव में भितरघात और बगावत का सामना करना पड़ा, जिसके चलते पार्टी की जीत का दायरा सिमट गया। सपा ने नगर पालिका बांसी और नगर पंचायत कपिलवस्तु में जीत दर्ज की, जबकि नगर पंचायत उसका बाजार की सीट उसके खाते से छिन गई और यहां से भाजपा कामयाब हुई।
राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा की सीट मानी जा रही नगर पालिका सिद्धार्थनगर में टिकट के एलान के बाद से सपा में गुटबाजी शुरू हो गई। सपा ने यहां से नए चेहरे राम सेवक लोधी पर दांव लगाया और एक मजबूत दावेदार जमील सिद्दीकी का टिकट काट दिया।
पार्टी के इस निर्णय के बाद मुस्लिम मतों में बिखराव दिखा और भाजपा ने गोविंद माधव के रूप में यादव प्रत्याशी को मैदान में उतार कर सपा के इस वोट बैंक में भी सेंधमारी कर दी। सपा प्रत्याशी के चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी बड़े नेताओं, पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की दमदार मौजूदगी भी नहीं देखी गई। जिसका नतीजा रहा कि सपा, लड़ाई से बाहर होते हुए पांचवें स्थान पर पहुंच गई और उसे करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। सपा के कब्जे में रही नपं उसका बाजार सीट पर पुनीता यादव एक बार चुनावी मैदान में थीं। भाजपा से हुई आमने-सामने की लड़ाई में इस बार उन्हें साढ़े तीन हजार से अधिक मतों से हार का सामना करना पड़ा।
माना जा रहा कि सपा को यहां भितरघात और पर्दे के पीछे पार्टी नेताओं की राजनीति का शिकार होना पड़ा। नवसृजित नगर पंचायत इटवा की बात करें तो यह सीट सपा के कद्दावर नेता पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व मौजूदा विधायक माता प्रसाद पांडेय के प्रतिष्ठा से जोड़ कर देखी जा रही थी। यहां पहली बार हुए चुनाव में भाजपा के साथ सपा में टिकट के लिए कई दावेदारों के बीच होड़ देखी गई। भाजपा ने विकास जायसवाल को टिकट देने के बाद संभावित बगावत पर काबू कर लिया और अपने नेताओं को एक मंच पर लाने में कामयाब रही, जबकि सपा यह काम करने में विफल रही, जिसका नतीजा रहा कि सपा के कई नेता खुलकर भाजपा के मंच पर आ गए और एक ने बगावत कर चुनावी मैदान में ताल ठोक दिया। जिसका नतीजा रहा कि सपा उम्मीदार ऐश्वर्य पांडेय चौथे स्थान पर पहुंच गईं और भाजपा के विकास जायसवाल, नगर पंचायत इटवा के पहले अध्यक्ष बनने में सफल रहे। यही हाल डुमरियागंज में भी दिखा, जहां स्थानीय सपा विधायक सैय्यदा खातून की तमाम कोशिशें, पार्टी प्रत्याशी कहकशां परवीन को जीत दिलाने के लिए नाकाफी साबित हुईं। माना जा रहा कि यहां सपा के धड़ों में जमकर गुटबाजी हुई और कई मजबूत नेताओं ने पर्दे के पीछे से पार्टी को हराने के लिए काम किया, जिसके चलते सपा इस सीट पर लड़ाई से बाहर हो गई और उसे चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा।

सामने आई सपा की गुटबाजी
डुमरियागंज नगर पंचायत चुनाव में सपा प्रत्याशी के परिवार के नेता एवं निवर्तमान अध्यक्ष जफर अहमद ने आरोप लगाया कि सपा के लोगों के विरोध के कारण ही उनकी हार हुई, जबकि जिनके ऊपर आरोप लगाए हैं, उन्होंने भी वीडियो के माध्यम से जवाब दिया है। इस तरह से वीडियो वायरल होना चर्चा का विषय बन गया है।
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