दवाओं की सूची चस्पा नहीं होने पर भड़के सांसद
जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक
अधिशासी अभियंता की गैरहाजिरी पर सांसद नाराज
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक हुई। इस दौरान अधिशासी अभियंता भारत-नेपाल बॉर्डर की गैरहाजिरी पर सांसद जगदंबिका पाल ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखने का निर्देश दिया। जिला अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता सूची सार्वजनिक करने का निर्देश दिया। पूर्ण हो चुके निर्माण कार्यों का लोकार्पण जनप्रतिनिधियों से कराने की हिदायत दी।
लोहिया कला भवन में निगरानी समिति की बैठक में अध्यक्षता करते हुए सांसद जगदंबिका पाल ने पूर्ण हो चुके कार्यों का शिलान्यास कराने पर जोर दिया। गन्ना विभाग की सड़कों को लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित करने का निर्देश दिया। अधिशासी अभियंता इंडो-नेपाल बॉर्डर के बैठक में उपस्थित नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की। जिला अस्पताल में उपलब्ध दवाओं की सूची नहीं लगाए जाने पर सख्त नाराजगी जताई। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को जिला अस्पताल में उपलब्ध दवाओं की सूची चस्पा कराने का निर्देश दिया। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों का सही ढंग से इलाज करने की हिदायत दी। टीबी के मरीजों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि मरीजों के खाते में प्रेषित करने का सीएमओ को निर्देश दिया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कठेला में डॉक्टर की तैनाती का निर्देश दिया। विधायक कपिलवस्तु श्यामधनी राही ने मंदिरों के विद्युतीकरण की बात रखी। डीएम दीपक मीणा ने समस्त अधिकारियों को निर्देश दिया कि शासन की मंशानुरूप कार्य करें। विधायक डुमरियागंज राघवेंद्र प्रताप सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद माधव, संयुक्त विकास आयुक्त अनिल कुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी शेषमणि सिंह, डीसी मनरेगा संजय शर्मा, जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह, समाज कल्याण अधिकारी डॉ. राहुल गुप्ता, एजाजुल हक उपस्थित थे।
जब सड़क पूरी बननी थी तो मरम्मत पर साठ लाख खर्च क्यों?
बैठक में सांसद जगदंबिका पाल ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता एसडी कनौजिया को कार्यों में अनियमितता बरतने और संविदाकर्मी को टेंडर जैसे महत्वपूर्ण कार्य सौंपने के लिए आड़े हाथों लिया। सांसद ने अधिशासी अभियंता से पूछा कि जब कोनकटी से गोल्हौरा की सड़क के पुनर्निर्माण के लिए 34 करोड़ रुपये जारी किए गए तो फिर उसकी मरम्मत पर साठ लाख रुपये क्यों खर्च किए गए। यह सरकारी धन का दुरुपयोग है। अधिकारी कोई जवाब नहीं दे सके। सांसद यहीं शांत नहीं हुए और अधिशासी अभियंता पर भ्रष्ट आचरण का आरोप लगाते हुए कहा कि जब नियमित लिपिक मौजूद है तो आपने टेंडर जैसे महत्वपूर्ण कार्य एक संविदाकर्मी को क्यों दिया, यहां तक कि गोपनीय कार्यों में इस्तेमाल होने वाला डोंगल भी उसी संविदाकर्मी को दिया जिसकी जिम्मेदारी अधिशासी अभियंता की होती है। सांसद की नाराजगी देखकर डीएम दीपक मीणा ने बीचबचाव किया और बताया कि उस कर्मचारी से डोंगल वापस ले लिया गया है और पटल भी। सांसद ने अधिशासी अभियंता एसडी कनौजिया को चेतावनी दी कि यदि उनके कार्यों से सरकार की छवि खराब हुई तो गंभीर परिणाम होंगे।