भारतभारी। डुमरियागंज तहसील के हल्लौर कस्बे के मोहल्ला नौबहारगंज में सोमवार की रात कर्बला के शहीदों की याद में एक तरही शब्बेदारी का आयोजन किया गया। अंजुमन गुंचा मातम के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अजादारों ने शिरकत की और नम आंखों से शोहदा-ए-कर्बला को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम की शुरुआत महताब हैदर के तिलावते-कुरान से हुई। इसके बाद शाहिद आलम और उनके साथियों ने मरसिया पढ़ी। मजलिस में जाकिर जमाल हैदर रिजवी ने कहा कि हुसैन ने कर्बला के जरिये दुनिया को हक, सच्चाई और इंसाफ का पैगाम दिया।
जमाल हैदर ने आगे कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में नाना के दीन को बचाने के लिए जो महान कुर्बानियां दीं, उससे पूरी दुनिया को यह संदेश मिलता है कि कभी भी जालिम के आगे सिर नहीं झुकाना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों ने कर्बला में भूखे-प्यासे रहकर शहादत देकर यह साबित कर दिया कि सच्चाई को कोई झुका नहीं सकता।
मौलाना ने अंत में इमाम हुसैन के बेटे सैय्यद सज्जाद का मसायब बयां किए, जिसे सुनकर कर अकीदतमंद सीना पीट-पीटकर रोने लगे। इसके बाद पूरी रात मातम का सिलसिला चला।
अंजुमन गुंचा मातम से वहिद अहमद और मेहमान अंजुमन जो अकबरपुर दहियावर से आई अंजुमन अब्बासिया मातम के हमजा अकबरपुरी ने अपनी दर्द भरी आवाज में नौहा पेश किया। इसके बाद अंजुमन गुलदस्ता-ए-मातम से नफीस हल्लोरी ने नौहा पढ़ा, जिस पर अकीदतमंदों ने जोश-ओ-खरोश से मातम किया। अंजुमन फरोग-ए-मातम से मुमताज हल्लोरी ने भी पुरदर्द नौहे पढ़े। अकबरपुर भौरा सादात से आई अंजुमन गुलशने इस्लाम के मशहूर नौहा खां जुहैर अकबरपुरी ने मशहूर नौहे पढ़े, जिस पर जोरदार मातम हुआ। मूसलाधार बारिश के बावजूद अजादारों ने सीनाजनी कर रातभर कर्बला वालों को पुरसा पेश किया।
इस मौके पर नवेद रिजवी, मेंहदी हैदर, इरफान हैदर, अनीस हैदर, जलाल हैदर, शब्लू राबिन सिंह के साथ बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।