इटवा। सीएचसी इटवा के पुराने भवन के ध्वस्तीकरण को महीनों बीत जाने के बाद भी आज तक बजट की स्वीकृति न होने से नए भवन का निर्माण अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। इसके चलते चिकित्साकर्मियों सहित मरीजों की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय तहसील का प्रमुख अस्पताल होने के चलते यहां रोजाना लगभग 300 मरीजों की ओपीडी होती है। यह संख्या यहां मिल रही सुविधाओं के चलते हैं। पहाड़ापुर निवासी अब्दुल लतीफ कहते हैं कि 30 शैय्या के बने इस सीएचसी भवन के चलते यहां मरीजों की संख्या में काफी वृद्धि हुई थी लेकिन पुराने भवन के जर्जर होने के बाद उसकी जगह नए भवन के निर्माण की मांग तेजी से उठने लगी थी। स्थान के अभाव में बगैर पुराने भवन के ध्वस्तीकरण के नए भवन का निर्माण संभव नहीं था।
पहाड़ापुर निवासी चिनकाऊ पाल कहते हैं कि जब तक पुराने भवन का ध्वस्तीकरण कराया जा रहा था तो प्रशासनिक सक्रियता से लगता था कि तुरंत बाद नए भवन का शिलान्यास हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ध्वस्तीकरण के महीनों बीत जाने के बाद अभी तक नए भवन निर्माण के लिए अभी तक कोई शुरुआत नहीं हुई है और न ही ऐसी कोई संभावना दिख रही है। इसके चलते जिला पंचायत के डाक बंगले में ओपीडी चलाना चिकित्सकों की मजबूरी बनी हुई है। यहां छोटे से बरामदे में दर्जनों मरीजों के बीच सारे चिकित्सक बैठने को मजबूर हैं। वहीं, मरीज अपनी बारी की प्रतीक्षा में घंटों इस उमस भरी गर्मी में डाक बंगले के बाहर और बरामदे में खड़े होने को मजबूर हैं।
इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप द्विवेदी का कहना है कि निर्माण कार्य के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों से ही मिल सकती है।