इटवा में पटाखा फोड़कर खुशी जताते भाजपा कार्यकर्ता।
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सिद्धार्थनगर। जिले की पांचों सीट पर भाजपा की ऐतिहासिक जीत ने वर्ष 1993 की यादें ताजा कर दी है। चौबीस साल पहले रामलहर में भी भाजपा ने जिले की सभी छह सीट (अब खेसरहा नहीं) जीत कर इतिहास बनाया था। ठीक वैसा ही इतिहास इस बार भी लिखा गया है। फर्क सिर्फ इतना है कि तब रामलहर थी और इस बार मोदी लहर। कई मायनों में यह लहर तब की राम लहर पर भी भारी पड़ी है। केवल डुमरियागंज को छोड़ दें तो इस बार जिले की हर विधानसभा क्षेत्र की जीत दस हजार से अधिक की है।
अयोध्या कांड के बाद हुए वर्ष 1993 के विधानसभा चुनाव में नौगढ़ (अब कपिलवस्तु) सीट से धनराज यादव, इटवा से स्वयंबर चौधरी, बांसी से जयप्रताप सिंह, शोहरतगढ़ से रवींद्र प्रताप चौधरी, खेसरहा से अमर सिंह और डुमरियागंज से प्रेमप्रकाश उर्फ जिप्पी तिवारी ने कमल खिलाया था। इसके बाद के चुनावों में भाजपा कभी तीन तो कभी दो सीटों तक सिमटती रही है। वर्ष 2012 में उसे महज एक बांसी विधानसभा सीट मिली थी। यहां भी जयप्रताप सिंह को जीत के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। जोरदार वापसी करते हुए भाजपा ने वर्ष 2017 के चुनाव में पांचों सीट अपने कब्जे में कर लिया है।
इसमें भी कपिलवस्तु पर जीत का अंतर 40 हजार वोटों से अधिक का है। शोहरतगढ़, बांसी, इटवा में भी बड़ी जीत मिली है। दो प्रतिद्वंद्वी कुनबों के एक होने के बाद राजनीतिक विश्लेषक डुमरियागंज में भाजपा को जीत से दूर बता रहे थे, मगर मोदी लहर में न सिर्फ सारे समीकरण ध्वस्त हो गए, बल्कि भाजपा ने यहां भी कमल खिलाने में कामयाबी हासिल की है।