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‘महत्वपूर्ण बैठक में भी सिर्फ चेहरा दिखाने आते हैं अधिकारी’

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लोहिया कला भवन में जिला योजना की बैठक को संबोधित करते प्रभारी मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य। - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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‘महत्वपूर्ण बैठक में भी सिर्फ चेहरा दिखाने आते हैं अधिकारी’
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जनप्रतिनिधियों के सवालों का जवाब नहीं मिलने पर फूटा प्रभारी मंत्री का गुस्सा
स्वामी प्रसाद मौर्य बोले, अगली बैठक में ऐसा हुआ तो कर दिया जाएगा बाहर, कार्रवाई भी होगी
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। जिला विकास योजना समिति की बैठक में जन प्रतिनिधियों के सवालों का जवाब नहीं दिए जाने पर अध्यक्षता कर रहे प्रभारी जिला मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य का गुस्सा अधिकारियों पर फूट पड़ा। बोले, इतनी महत्वपूर्ण बैठक में अधिकारी सिर्फ अपना चेहरा दिखाने आए हैं। अधिकारियों को अपने विभाग की ओर से कराए गए विकास कार्यों तक की जानकारी नहीं है। उनसे बेहतर जानकारी तो जिले के मंत्री, सांसद और विधायक को है। अगली बैठक में यदि इसी तरह हाथ-मुंह बांधकर आए तो बैठक से बाहर कर दिया जाएगा और कार्रवाई भी की जाएगी।
लोहिया कला भवन में रविवार को आयोजित जिला योजना समिति की बैठक में 42,175 लाख रुपये के विकास कार्यों का खाका तैयार किया गया। एआर कोऑपरेटिव ने बताया कि जिले में 30 हजार मीट्रिक टन के सापेक्ष 35,282 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है। समिति के सदस्यों ने आरोप लगाया कि किसान धान बेचने को भटकता रहा और बिचौलियों-ठेकेदारों से खरीद की गई। सांसद जगदंबिका पाल ने नौगढ़ ब्लंॉक के बेलटीगर, शिवपत, सिरवत क्रय केंद्र सड़क पर होने के बावजूद इनमें खरीद बहुत ही कम होने पर नाराजगी जताई। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सतीशचंद्र द्विवेदी, स्वतंत्र प्रभार ने बताया कि कठेला स्थित बंदुहारी क्रय केंद्र पर धान खरीद नहीं हो रही। बताया गया कि सचिव क्रय केंद्र बंद कर भाग गया है। मंत्री ने पूछा कि सचिव के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। एआर सहकारिता जवाब नहीं दे सके। मंत्री ने सचिव से इस्तीफा लिखवा कर दूसरे को तैनात कराने का आदेश दिया। जिला वन अधिकारी आकाशदीप वधावन ने बताया कि इस वर्ष जिले में 9.65 लाख पौधे लगाए गए। सांसद जगदंबिका पाल ने पूछा कि तीन साल में जिले में बीस लाख पौधे लगाए गए तो वन क्षेत्र मात्र दो फीसदी ही क्यों है, यह बढ़ा क्यों नहीं। शिक्षक विधायक ध्रुव त्रिपाठी ने बौड़िहार का मामला उठाया। बताया कि यहां प्रत्येक वर्ष 1100 बीघे जमीन पर पौधरोपण कराया जाता है लेकिन वन क्षेत्र नहीं बढ़ता। उन्होंने वन क्षेत्र के बीच से होकर जाने वाले मार्ग को खोले जाने की मांग की। बैठक में कृषि, गन्ना विकास, पशुपालन, दुग्ध विकास, सहकारिता, वन, ग्राम्य विकास, सिंचाई, मनरेगा आदि योजनाओं के तहत 42,175 लाख के प्रस्तावित कार्यों को स्वीकृति मिली। बैठक में सांसद जगदंबिका पाल, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी के अलावा विधायक अमर सिंह चौधरी, शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद माधव, विधान परिषद सदस्य सनी यादव के प्रतिनिधि सोनू यादव, जिलाधिकारी दीपक मीणा, सीडीओ पुलकित गर्ग, जिला वन अधिकारी आकाशदीप वधावन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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जिले में खुदवाए गए 813 तालाब पर एक का भी नाम नहीं बता पाए
डीसी मनरेगा संजय शर्मा ने बताया कि जिले में एक हजार के सापेक्ष 813 तालाब खुदवाए गए हैं। शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने उनसे खेसरहा ब्लॉक के किसी एक तालाब का नाम बताने को कहा, जिसकी खुदाई कराई गई और उसकी गहराई बढ़ी। तालाबों की खुदाई से निकली मिट्टी कहां गई। आंकड़ों को फर्जी करार देते हुए कहा कि निकाली गई मिट्टी ठेकेदार को दे दी गई क्या। सांसद जगदंबिका पाल ने मानव दिवस सृजित करने में पिछड़ने पर नाराजगी जाहिर की।
‘मुख्यालय आने वाला कोई रास्ता बताएं जिनसे बगैर पीठ दर्द यात्रा संभव हो’
जिले में सड़कों के निर्माण की बात आई तो शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कार्यकारी अभियंता से पूछा कि मुख्यालय आने वाले रास्तों के नाम बताएं, जिनमें बिना पीठ दर्द के पहुंचा जा सके। इस पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी ने जिले में बनने वाली बेहतरीन सड़कों का जिक्र किया। जब उन्होंने बांसी-सकारपार मार्ग निर्माण की बात की तो ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने चुटकी ली कि यह सड़क तो झंझट में पड़ी है कि आपने बनवाई कि सांसद जी ने। सांसद जगदंबिका पाल और डॉ. सतीश द्विवेदी दोनों ने एक सुर में कहा कि सड़क मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बनवाई है। ध्रुव त्रिपाठी ने बृजमनगंज, लोटन, सकारपार, बड़सर मार्गों की जर्जर हालत का जिक्र किया। डॉ. द्विवेदी ने इन सभी सड़कों के जल्द बनाए जाने की बात कही।
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एसीएमओ नहीं बता पाए, जिला अस्पताल में हैं कितने विशेषज्ञ चिकित्सक
स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा में सांसद जगदंबिका पाल नाराज दिखे। बोले कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों को बाहर से दवाएं लिखी जाती हैं। उन्होंने एसीएमओ को सख्त आदेश दिया कि मुख्य जगह पर उन दवाओं की सूची लगवाई जाए जो मुफ्त में मिलती हैं। एसीएमओ ने बताया कि अस्पताल में 192 प्रकार की दवाएं निशुल्क दी जाती हैं। मरीजों को गोरखपुर रेफर किए जाने पर भी नाराजगी व्यक्त की। शिक्षक विधायक ने पूछा कि जिला अस्पताल में कितने विशेषज्ञ चिकित्सक हैं, एसीएमओ जवाब नहीं दे सके। इस पर प्रभारी मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने नाराजगी जताई और सभी अधिकारियों को अगली बैठक में पूरी तैयारी से आने के सख्त निर्देश दिए।
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