सिद्धार्थनगर। जिला क्षय रोग अस्पताल में गंभीर टीबी मरीजों की दवा एक माह से बंद हो गई है। इस कारण उनकी तबीयत गंभीर होने से जान खतरे में पड़ सकती है, जबकि दवा बंद होने से गंभीर मरीजों के शरीर में कीटाणुओं की संख्या बढ़ने से समाज के अन्य लोगों में भी टीबी संक्रमण की आशंका है। गंभीर समस्या है कि गंभीर मरीज से संक्रमण होता है तो उसी श्रेणी का संक्रमण होता है।
जिले में एमडीआर के अंतर्गत 270 गंभीर मरीज हैं जबकि करीब 2,285 सामान्य मरीजों को इलाज चल रहा है। जिला क्षय रोग अस्पताल में तीन माह से दवाइयों की कमी है। इस कारण मरीजों को पूरी दवा नहीं मिल पा रही है। दवा की अधूरी खुराक के कारण मरीजों की टीबी और गंभीर रूप ले रही है। एक माह से सात में से पांच दवाइयां समाप्त हो गई। बड़ी समस्या है कि एक दवा निजी मेडिकल स्टोर पर भी नहीं मिलती है, जबकि अन्य दवाइयां काफी महंगी है। दवा बंद होने से टीबी मरीज और गंभीर स्थिति में पहुंच रहे हैं। 15 दिन पहले ही एमडीआर टीबी से बीमार इटवा में एक युवक ने दम तोड़ दिया है, दो माह से उसकी दवा नियमित नहीं हो पा रही थी।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सिद्धार्थनगर के अध्यक्ष एवं पूर्व सीएमओ डॉ. एमपी कसौधन ने बताया कि जब कोई मरीज नियमित दवा नहीं खाता है तो सामान्य दवा उसके शरीर पर असर नहीं करती है। वह एमडीआर कटेगरी में चला जाता है। यदि एमडीआर मरीज की दवा बंद है तो उससे माध्यम से संक्रमण बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है। इसमें कम रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में संक्रमण फैलने की आशंका है, इनमें बच्चे, बुजुर्ग और बीमार चपेट में आ सकते हैं। जब मरीज की दवा नियमित चलती है तो उससे संक्रमण की आशंका कम होती है।
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वर्जन
जिला क्षय रोग अस्पताल में दवाइयों को मंगाने के लिए पत्राचार किया गया है। स्थानीय स्तर पर भी कंपनी से दवा का आर्डर किया गया है, लेकिन कंपनी से 15-20 दिन बाद दवा आपूर्ति का जवाब आया है। कोशिश की जा रही है कि जल्द ही पर्याप्त दवाओं की आपूर्ति हो जाए।
-डॉ. मानवेंद्र पाल, डिप्टी डीटीओ