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Siddharthnagar News: छह घंटे गुल रही मेडिकल कॉलेज की बिजली, गर्मी से बिलबिला उठे मरीज

Wed, 21 Jun 2023 10:58 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के जिला अस्पताल में भूमिगत केबल में फॉल्ट होने बुधवार सुबह 7.15 बजे से छह घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। इस कारण ओपीडी, वार्ड और इमरजेंसी में सैकड़ों मरीज व उनके परिजन गर्मी व उमस से बिलबिला उठे। इस कारण पैथोलॉजी, एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड जांचें ठप हो गईं। घंटों इंतजार करने के बाद जांच कराने आए 450 से अधिक मरीज मायूस होकर लौट गए।
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बुधवार की सुबह जिला अस्पताल के भूमिगत केबल में फॉल्ट आया, जबकि बिजली या जनरेट से आपूर्ति के लिए यह इकलौती लाइन है। अस्पताल में आने वाले मरीजों के साथ ही स्वास्थ्यकर्मी और चिकित्सक भी बेहाल दिखे। गर्मी से राहत पाने के लिए कोई पंखा झलता हुआ दिखा, तो कोई रुमाल से हवा करने की कोशिश करते दिखा। इसके बाद भी पूरा शरीर पसीने से तरबतर हो रहा था। वहीं, आपूर्ति न होने से इमरजेंसी से लेकर ओपीडी, एक्से-रे, अल्ट्रासाउंड और ब्लड जांच व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई थी। जांच न होने के कारण चार सौ से अधिक मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा। हर कोई अस्पताल प्रशासन को कोसता हुआ नजर आया।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में बिजली आपूर्ति के लिए लगे जेरनेटर के केबल से ही बिजली की आपूर्ति होती है। इसके साथ ही बिजली आते ही उससे आपूर्ति बहाल हो जाती है। एक ही केबल से जेरनेटर और बिजली दोनों से सप्लाई होती है। सुबह तकरीबन सवा सात बजे आपूर्ति के लिए लगा केबल कहीं बर्स्ट हो गया। इससे एकाएक बिजली व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई। हर तरफ अंधेरा छा गया और गर्मी से लोग व्याकुल होने लगे। इलेक्ट्रिक विभाग की टीम जांच में लगी तो पता चला कि मेल केबल बर्स्ट हो गया है। इसके बाद मजदूरों को बुलाकर खुदाई करके केबिल निकाला गया और बनाया गया। तबतक साढ़े छह घंटे गुजर चुके थे। सुबह सवा साते बजे कटी बिजली दोपहर डेढ़ बजे बहाल हुई। इस दौरान गर्मी मरीजों को आफत बनकर टूट रही थी। हर कोई गर्मी से बेहाल था। गनीमत रही कि बारिश होने से मौसम थोड़ा बदल गया है नहीं तो लोग और परेशान हो जाते।
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कटौती के दौरान अस्पताल में गर्मी से हाहाकार मचा हुआ था। खुद तो लोग पसीने से भीग रहे थे, लेकिन मरीजों को पंखा झलते रहे। फिर बीमार व्यक्ति गर्मी से व्याकुल हो जा रहा था। इलाज के लिए आने वाले मरीज अस्पताल प्रशासन को कोसते हुए दिखे। वहीं बिजली की आपूर्ति ठप होने के कारण कोई जांच नहीं हो पा रही थी, जो मरीजों के लिए बड़ी मुसीबत रही। बिजली बहाल हुई तो जांच का टाइम खत्म हो चुका था और मरीज निराश होकर लौट चुके थे। इस संबंध में प्राचार्य डॉ. एके झा ने बताया कि भूमिगत केबल में फॉल्ट होने के कारण बिजली कटी थी, कोशिश की जाएगी कि दोबारा ऐसा फॉल्ट न हो।
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नहीं हुआ रजिस्ट्रेशन, खून के सैंपल भी नहीं लिए गए मेडिकल कॉलेज के लैब में मौजूदा समय में प्रतिदिन 200 से 250 मरीजों की जांच प्रतिदिन होती है। यह मरीज ओपीडी वाले होते हैं। इसके अलावा अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की जांच 24 घंटे होती है। बिजली आपूर्ति ठप होने से न तो मरीजों की रजिस्ट्रेशन हो पाया और न ही खून के एक भी सैंपल की जांच हुई। बिजली आपूर्ति के ठप हो जाने से एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जांच भी ठप थी। मरीज बार- बार टेक्निीशियन से यही पूछ रहे थे कि साहब कब जांच शुरू होगी। बार-बार उन्हें जवाब मिल रहा था कि बिजली आन के बाद। यही कहते-कहते दोपहर के डेढ़ बज गए और बिना जांच के मरीजों को लौटना पड़ता। यहां प्रतिदिन सौ से अधिक एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड के लिए आए करीब 40 मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा।

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गनीमत रही कि बच्चों के वार्ड में नहीं ठप हुई आपूर्ति

मेडिकल कॉलेज में बच्चों के लिए एसएनसीयू और पीआईसीयू वार्ड बना हुआ है। वहीं उसी जेरनेटर से होकर उन दोनों वार्ड की बिजली आपूर्ति के लिए अलग केबल लगा हुआ है। गनीमत रही कि इन दोनों वार्डों की आपूर्ति के लिए लगा बिजली का केबल नहीं जला, वर्ना स्थिति और गंभीर हो जाती। दोनों वार्ड में 35 बच्चे भर्ती हैं।

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मोबाइल का टार्च जलाकर लगना पड़ा इंजेक्शन
इमजरजेंसी वार्ड में आने वाले मरीजों को इंजेक्शन लगाना ही पड़ता है। बिजली गुल होने के कारण अंधेरा छाया हुआ था। ऐसे में आने वाले मरीजों को इंजेक्शन लगाने के लिए मोबाइल का टार्च जलाना पड़ रहा था। इसके बाद स्वास्थ्यकर्मी किसी तरह से उन्हें इंजेक्शन लगा रहे थे। बिजली न होने के कारण उन्हें परेशानियों से गुजरना पड़ा। सुबह से दोपहर 12 बजे तक 11 मरीज इमरजेंसी वार्ड में आए थे।

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गर्मी से बेहाल, पसीने से तरबतर होकर बांटते रहे दवा

बिजली कटने के बाद भी ओपीडी चल रही थी। चिकित्सक मरीजों को देख रहे थे। बिजली कटने से कंप्यूटर से पर्ची कटने की व्यवस्था ठप हुई तो मैनुअल पर्ची काटी गई। कुल 1068 मरीज बुधवार को ओपीडी में पहुंचे थे। चिकित्सक को दिखाने के बाद दवा लेने के लिए लोगों को परेशान होना पड़ा। जहां बंद कमरे में गर्मी तरबतर होकर स्वास्थ्यकर्मी दवा बांट रहे थे। वहीं लाइन में लगकर दवा लेने के लिए मरीज भी गर्मी से परेशान रहे।

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बिजली ठप होने से यहां हुई परेशानी

बिजली व्यवस्था के ठप हो जाने से इमरजेंसी, जनरल, सर्जिकल वार्ड, ओपीडी, लैब, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड सहित अन्य विभाग में परेशानी ही परेशानी रही। हाल यह था कि गर्मी से बेहाल होकर लोग इधर-उधर भागते हुए नजर आए।

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बोले मरीज

बच्चे का एक्स-रे करवाने के लिए आया था। जबसे अस्पताल पहुंचा हूं, बिजली आपूर्ति ठप है। दो घंटे बाद भी जांच नहीं हुई। वापस जाना पड़ेगा। बिजली आने की उम्मीद नहीं है, बिना जांच के घर जाना पड़ेगा।

- रामभवन, निवासी महला
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डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच लिखी थी। सुबह समय से पहुंच गई, जिससे जांच हो जाए। लेकिन, 11 बज गए, अभी तक जांच शुरू नहीं हुई। बिजली आपूर्ति न होने से जांच ठप होने की बात बता रहे हैं। बिना जांच के ही लौटना पड़ेगा।

- अंजना, निवासी सिविल लाइन मोहल्ला

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नौ बजे से अस्पताल में आई हूं। डॉक्टर साहब ने खून जांच कराने के लिए कहा था। 10 बजे लैब में पहुंच गई, लेकिन 12 बज गए हैं, अभी रजिस्ट्रेशन ही शुरू नहीं हुआ है। जांच कैसे होगी। बिना जांच के ही जाना पड़ेगा।

चंद्रमा, निवासी बभनी शोहरतगढ़
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बेटे को कमजोरी थी, उसके दिखाने के लिए आया था। डॉक्टर साहब ने देखने के बाद खून जांच कराने के लिए कहा। दोपहर के 12 बजे चुके हैं, जांच शुरू ही नहीं हो पाया है। अब बाहर से जांच करवा कर लाएंगे।

ओमप्रकाश निवासी ककरहवा बाजार

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गर्मी ने परेशान कर दिया है। सोमवार को रिश्तेदार को लेकर इमरजेंसी वार्ड में भर्ती हैं। गर्मी से वैसे ही परेशानी हो रही थी। सुबह बिजली कट गई 11.30 बज गए हैं अभी तक बिजली की आपूर्ति शुरू नहीं हुई। मरीज गर्मी से परेशान हैं, कहां लेकर जाएं। कोई कुछ बता भी नहीं पा रहा है।

संतराम, निवासी कठेला
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दो केबल होना जरूरी
अस्पताल हो या फिर कोई भी बड़ा संस्थान, बिजली की अलग-अलग व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। जेनरेटर के लिए अलग केबल और बिजली आपूर्ति के लिए अलग केबल। इससे यह सहूलियत मिलती है कि एक किन्हीं कारणों अगर एक व्यवस्था ध्वस्त हो जाए तो दूसरे से काम चलाया जा सके। मेडिकल कॉलेज में भी बिजली आपूर्ति के लिए अलग-अलग केबल होना चाहिए।
- मनोज कुमार तिवारी, इलेक्ट्रीशियन
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दो दिन पहले ऐसे फाल्ट होता तो हाहाकार मच जाता
जिला अस्पताल में बिजली कटी तो गर्मी और उमस से लोग बेहाल थे। गोरखपुर से इलाज कराने आई चंद्रसेना देवी ने कहा कि दो दिन पहले ऐसी बिजली कट जाती तो क्या होता? उनका इशारा था कि बारिश के होने के बाद मौसम नम हो गया है। गर्मी और उमस है, लेकिन असहनीय तापमान 43-44 डिग्री सेल्सियस नहीं है।
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