सिद्धार्थनगर। युवाओं में तेजी से बढ़ रही नशे की प्रवृत्ति अब स्वास्थ्य विभाग और समाज दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। नशे की गिरफ्त में आकर युवा न सिर्फ अपना भविष्य खराब कर रहे हैं बल्कि परिवार और समाज भी इसके दुष्प्रभाव झेल रहा है।
जिले के माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में संचालित नशामुक्ति केंद्र में लगातार बढ़ती मरीजों की संख्या इस खतरे की गंभीरता को दर्शा रही है। स्थिति को देखते हुए मेडिकल कॉलेज का मानसिक रोग विभाग अब विद्यालयों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है।
करीब दो वर्ष पहले मेडिकल कॉलेज में स्थापित नशामुक्ति केंद्र मानसिक रोग विभाग की निगरानी में संचालित हो रहा है। यहां डॉक्टर, काउंसलर और आवश्यक दवाओं की सुविधा उपलब्ध है। वर्तमान में करीब 500 मरीज नियमित रूप से इलाज और काउंसिलिंग ले रहे हैं। वहीं, हर माह 25 से 30 नए गंभीर मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकांश युवा और किशोर वर्ग के लोग शामिल हैं।
डॉक्टरों के अनुसार नशे की चपेट में आने वाले लोगों में शराब, गांजा, स्मैक, नशीली दवाओं और अन्य मादक पदार्थों का सेवन करने वाले मरीज शामिल हैं। कई मामलों में नशा केवल शारीरिक बीमारी तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह मानसिक तनाव, अवसाद, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और हिंसक व्यवहार जैसी समस्याओं को भी जन्म देता है। लगातार बढ़ रहे मामलों से स्वास्थ्य विभाग भी चिंतित है।
विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में बढ़ता तनाव, गलत संगत, बेरोजगारी, सोशल मीडिया का प्रभाव और कम समय में सफलता पाने की चाह उन्हें नशे की ओर धकेल रही है। शुरुआत में कई किशोर और युवा शौक या दोस्तों के दबाव में नशा करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत गंभीर लत में बदल जाती है। बाद में इसका असर परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर भी पड़ता है।