मेडिकल कॉलेज में चहारदीवारी की खिड़की से चल रहे 14 मेडिकल स्टोर
मेडिकल कॉलेज में सक्रिय हैं 50 से अधिक दलाल, नहीं हो रही है कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल काॅलेज के आवासीय परिसर में दवा और जांच के धंधे का खेल साफ नजर आ रहा है। यहां के धंधेबाजों की पकड़ इतनी गहरी है कि कार्रवाई नहीं हो रही है। मेडिकल कॉलेज की चहारदीवारी के पीछे 14 से अधिक मेडिकल कॉलेज स्टोर एवं जांच सेंटर हैं। ये चहारदीवारी के बीच छोड़ी गई छोटी-छोटी खिड़कियों के सहारे चल रहे हैं।
कई स्थानों पर पर मिट्टी पाट दी गई है, जहां खड़े होकर लोग पर्चे थमाकर दवा खरीद रहे हैं, जांच करवा रहे हैं। यह ऐसा स्थान है, जहां बिना भेजे कोई नहीं जा सकता है, लेकिन सबसे अधिक दवाइयां यहीं से बिक रही हैं।
मेडिकल कॉलेज में मरीज माफिया और कुछ डॉक्टरों का गठजोड़ है। इससे वीरान स्थान पर भी दवा और जांच का धंधा खूब फल-फूल रहा है। दवा स्टोर के गेट और मेडिकल कॉलेज के जिला अस्पताल की चहारदीवारी के बीच करीब चार फीट जगह है। वहां जाने के लिए पतला रास्ता है। उधर से कम लाेग ही जाते हैं। चार साल पहले जिलाधिकारी दीपक मीणा ने चहारदीवारी ऊंची करा दी तो ठेकेदार ने चहारदीवारी में छोटी-छोटी खिड़कियां बना दीं।
इसके बाद धंधेबाजों ने चहारदीवारी के किनारे मिट्टी पाट दी और सीढ़ी बना ली। तत्कालीन सीएमएस डॉ. नीना वर्मा ने जेसीबी से चहारदीवारी की सीढि़यां हटवा दी थीं, लेकिन इनके धंधे पर कोई असर नहीं पड़ा। वहां पर 20 दुकानें हैं, जबकि एक और नई दुकान खुल रही है। एसडीएम डॉ. ललित कुमार मिश्र ने भी चहारदीवारी के बैनर, पोस्टर हटवा दिए थे।
एक स्वास्थ्य कर्मी ने बताया कि मेडिकल स्टोर वालों के 50 से अधिक दलालों ने मेडिकल कॉलेज में घुसपैठ बनाई है। ओपीडी में मिले लोटन के बेलौहा निवासी सूर्यभान ने बताया कि पेट का इलाज कराने आए थे। डॉक्टर ने बाहर की दवा लिख दी। जैसे ही वह बाहर निकले तो एक युवक उनसे बात करने लगा। उन्होंने बताया कि रुपये नहीं हैं तो उसने बात करनी बंद कर दी।
दवा पूरी, फिर भी दिखा रहे बाहर की राह
मेडिकल कॉलेज के स्टोर में 286 में 249 प्रकार की दवाइयां हैं। दवा पर्याप्त होने के बावजूद ओपीडी में मौजूद दलाल मरीजों को चहारदीवारी के पास की दुकान दिखा रहे हैं। यहीं नहीं, जो लोग जाने में असमर्थता जताते हैं, उन्हें अपनी बाइक पर बैठाकर मेडिकल स्टोर तक ले जाते हैं। सेवा भाव से ओपीडी तक पहुंचा भी देते हैं। कुछ लोग उन्हें पर्चे और रुपये दे देते हैं। वे दवा खरीदकर ओपीडी में पहुंचा दे रहे हैं।
अंदर की दवा ले गए तो वापस भेजा
ओपीडी के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की ओपीडी में सोमवार को इलाज कराने पहुंची रानी रस्तोगी और संभा ने बताया उन्हाेंने चार दिन पहले बाहर की मेडिकल स्टोर से दवा खरीदी थी। दवा दिखाने गई तो ओपीडी में बताया गया कि दवा गलत है। वापस कर दो। इसलिए सोमवार को रानी रस्तोगी ने 1700 और संभा ने 1390 रुपये की दवा खरीदी।
बाहर से दवा खरीदी तो हुआ ऑपरेशन
बांसी के महनी के जितेंद्र चौरसिया अपने पिता के ऑपरेशन के बाद पट्टी कराने आए थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता को फोड़ा हो गया था। ऑपरेशन कराने के बाद 2900 रुपये की दवा बाहर की खरीदी। पट्टी बदलवाने के लिए 360 रुपये का मरहम खरीदवाया गया।
इन्होंने खरीदी बाहर की दवा
मैं अपने भाई के कान का इलाज कराने आया हूं। डॉक्टर ने बाहर की दवा लिख दी। मैं बाहर निकला तो एक आदमी ने बताया कि ब्लड बैंक के सामने से चले जाओ, दवा सस्ती मिलेगी। मैंने 800 रुपये की दवा खरीद ली है।
-राजेश, पटनी जंगल
मेडिकल कॉलेज में त्वचा का इलाज कराने आया हूं। डॉक्टर के पास बैठे व्यक्ति ने बताया कि अंदर की दवा से बीमारी ठीक नहीं होगी। चहारदीवारी के पास दवा ले लो। 1700 रुपये की दवा खरीदा हूं। 60 किमी दूर से आया हूं, लेकिन दवा नहीं मिली।
-महेश, बगुलहवा
वर्जन
मेडिकल कॉलेज की चहारदीवारी के पास दवा बेचने से रोकने के लिए कई बार प्रयास किया, लेकिन कारोबारी रास्ता बना लेते हैं। इसी स्थान पर क्रिटिकल केयर यूनिट बनना प्रस्तावित है। उसके बाद चहारदीवारी के पास दवा बेचने का काम नहीं हो पाएगा। अस्पताल में 250 प्रकार की दवाइयां हैं। जिन्हें गुमराह किया जाता है, उन मरीजों को भी शिकायत करनी चाहिए।
-डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य