गेहूं की सरकारी खरीद में बिचौलियों की चांदी है। क्रय केंद्र और बिचौलियों की मिलीभगत से खरीद का रजिस्टर तो बखूबी मेंटेन हो रहा है पर किसानों की उपज सरकारी हाथों से दूर होती जा रही है। जिले के मोहाना, बर्डपुर, भनवापुर और शोहरतगढ़ क्षेत्रों में किसानों से गेहूं न खरीदकर बिचौलियों से सेटिंग के आधार पर गेहूं की खरीद हो रही है। कई केंद्रों पर तय रेट से कम दर पर भुगतान की शिकायतें मिल रही हैं।
जिले के किसानों की उपज औनै-पौने दाम पर बिक रही है। दस रुपये ढुलाई खर्च सहित सरकारी रेट 1635 रुपये प्रति क्विंटल का है पर किसानों को 1300-1400 रुपये प्रति क्विंटल का रेट मिल रहा है। सरकारी जांच-पड़ताल के अभाव में क्रय केंद्र संचालक बिचौलियों से मिलकर खरीददारी का रिकॉर्ड मेंटेन करने में जुटे हैं। बिचौलियों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने इस बार किसानों के खाते में सीधे उपज का मूल्य भेजने की व्यवस्था की है। जोतबही के रिकॉर्ड के साथ किसानों को अपने बैंक की डिटेल भी क्रय केंद्रों को मुहैया कराने की व्यवस्था प्रारंभ है। इस व्यवस्था का तोड़ भी क्रय केंद्र के संचालकों ने खोज निकाला है। किसानों को कागजी झंझट से बचाने के नाम पर खरीद ऐसे व्यक्ति के खाते के मार्फत पूरी कर ली जा रही है जिसकी सेटिंग क्रय केंद्र संचालकों से है। पीसीएफ के अधिकतर क्रय केंद्रों की स्थिति यह है कि यहां खरीद का काम रात में चलता है। ग्रामीण क्षेत्र में पूरे बिचौलिए अपने नेटवर्क के मार्फत औने-पौने रेट पर गेहूं खरीदकर रात में क्रय केंद्रों को सरकारी रेट पर बेचकर तत्काल तीन सौ रुपये प्रति क्विंटल से अधिक की कमाई कर रहे हैं। जोगिया विकास खंड में करौंदा मसिना में बनाया गया पीसीएफ का केंद्र अभी भी सन्नाटे में डूबा है यहां अब तक सिर्फ 100 क्विंटल खरीद ही हो सकी है। भनवापुर और मोहाना क्षेत्र में सरकारी खरीदारी का बुरा हाल है। केंद्रों पर किसानों को चार से पांच दिन बाद का नंबर मिलता है। इन परेशानियों से बचने के लिए किसान अपनी उपज कम दर पर बेचने को मजबूर हैं। इस संबंध में डिप्टी आरएमओ जितेंद्र यादव का कहना कि शिकायत मिली है। दो दिन के भीतर जांच करते हुए कार्रवाई की जाएगी। खरीद प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। अगर किसी भी स्तर पर गड़बड़ी है तो संबंधितों को बख्शा नहीं जाएगा।